चित्रकूट जिले का एनकाउंटर से पुराना नाता है। करीब एक दशक पहले तक चित्रकूट में आतंक चरम पर था। जंगलों और गांवों के आसपास गोलियों की आवाजें आम थीं, भयभीत रहते थे। शाम होते ही सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता था और लोग घरों से बाहर निकलने से कतराते थे। डकैतों के सफाए के बाद ही लोगों को इस दहशत से मुक्ति मिली थी लेकिन एक बार फिर हुई मुठभेड़ ने उन खौफनाक दिनों की यादें ताजा कर दी हैं।
इस मुठभेड़ में बरगढ़ कस्बा निवासी आयुष केसरवानी का अपहरण कर हत्या करने में शामिल हत्यारे कल्लू उर्फ साहबे आलम का एसओजी, एसटीएफ ने मिलकर एनकाउंटर किया है।
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भीड़ द्वारा लगाई आग में जलता सामान
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पहले भी हो चुके हैं ऐसे जघन्य अपराध
13 फरवरी 2024 को रैपुरा कस्बा निवासी गुटखा व्यापारी राजधर कोटार्य के किशोर बेटे का अपहरण कर लिया गया था। दो दिनों से लापता किशोर के पिता से अपहरणकर्ताओं ने 50 लाख रुपये की फिरौती मांगी थी।
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भीड़ द्वारा लगाई आग में जलता सामान
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
शुरुआत में परिजनों ने इस कॉल को गंभीरता से नहीं लिया लेकिन दोबारा फोन आने पर पत्नी ने थाने पहुंचकर पुलिस को सूचित किया। इसके बाद पुलिस ने देर शाम देवांगना घाटी के जंगल से किशोर का शव बरामद किया। उसकी निर्मम हत्या की गई थी और सिर पत्थर से कुचला हुआ मिला था।
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हत्या के आरोपी कल्लू का फाइल फोटो
– फोटो : परिजन
12 फरवरी 2019 को भी एक ऐसी ही भयावह घटना सामने आई थी। उस समय चित्रकूट के एक तेल व्यापारी के 10 वर्षीय जुड़वा बेटों को स्कूल जाते समय अगवा कर लिया गया था। परिजनों ने 20 लाख रुपये की फिरौती भी अदा की थी लेकिन इसके बावजूद अपहरणकर्ताओं ने दोनों मासूमों की हत्या कर दी थी।
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मासूम बेटे के शव को देखकर बिलखते पिता
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बदमाशों के साथ पहले भी हो चुकी हैं मुठभेड़
जिले की पुलिस पहले भी कई मुठभेड़ कर चुकी है। इसमें वर्ष 2021 में 30 अक्तूबर को बहिलपुरवा थाना क्षेत्र के जंगल में छोटी बिलहरी गांव निवासी डकैत गौरी यादव को एसटीएफ ने मुठभेड़ में मार गिराया था।