प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में बीते वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। बजट सत्र के पहले दिन प्रस्तुत आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार वर्ष 2017-18 से 2023-24 के बीच प्रदेश की साक्षरता दर में छह से आठ प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। सरकार ने प्राथमिक शिक्षा में ड्रॉपआउट रोकने से लेकर उच्च शिक्षा को वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया है। शिक्षा को कौशल विकास, नवाचार और स्टार्टअप से जोड़कर प्रदेश की प्रगति का मजबूत आधार बनाया जा रहा है।
आर्थिक समीक्षा के अनुसार पुरुष साक्षरता दर 2017-18 के 80.6 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में 86 प्रतिशत हो गई, जबकि महिला साक्षरता दर 62.9 प्रतिशत से बढ़कर 70.4 प्रतिशत तक पहुंच गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत प्रदेश में 2.62 लाख से अधिक विद्यालयों का नेटवर्क तैयार किया गया है। इनमें 135658 प्राथमिक, 90243 उच्च प्राथमिक, 11938 माध्यमिक, 24519 उच्च माध्यमिक स्कूल हैं। पीएमश्री योजना में 1722 विद्यालयों का चयन कर उन्हें हरित विद्यालय के रूप में विकसित किया जा रहा है।
शिक्षा सत्र 2025-26 में कक्षा 1 से 8 तक के 1.47 करोड़ बच्चों को नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकें दी गईं। परिषदीय स्कूलों में डीबीटी से यूनिफॉर्म और स्टेशनरी के लिए 1200 रुपये प्रति छात्र दिए जा रहे हैं। प्राथमिक शिक्षा के बजट में भी 2016-17 की तुलना में 2.08 गुना वृद्धि हुई है। उच्च शिक्षा में गुणवत्ता सुधार के चलते छह विश्वविद्यालयों को नैक ए++ रेटिंग मिली है, जो प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है।
