मॉल के बेसमेंट के लिए नोएडा में खोदे गए गड्ढे में भरे पानी में डूबकर युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत पर बढ़ते आक्रोश के बीच राज्य सरकार ने नोएडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) लोकेश एम को हटा दिया है। पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया है, जिसमें मेरठ के मंडलायुक्त, मेरठ जोन के एडीजी और पीडब्ल्यूजी के मुख्य अभियंता शामिल हैं। एसआईटी से पांच दिन में जांच रिपोर्ट तलब की गई है। उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 27 वर्षीय इंजीनियर युवराज मेहता की मौत का संज्ञान लेते हुए सोमवार को एसआईटी गठित करने का आदेश दिया। इसके तुरंत बाद सीईओ को हटाने का सरकारी आदेश भी आ गया। फिलहाल उन्हें प्रतीक्षारत रखा गया है। प्राधिकरण के सीईओ होने के नाते 2005 बैच के आईएएस अधिकारी लोकेश एम नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक भी थे। हाल ही में वह तब विवादों में आए थे, जब मेट्रो रेल के नववर्ष के कैलेंडर में उनकी सितार बजाते तस्वीर छपी थी। हालांकि, तब वह कार्रवाई से बच गए थे और राज्य सरकार ने प्राधिकरण के विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) महेंद्र प्रसाद को हटा दिया था। नोएडा प्रशासन ने भी इस मामले में पहले ही कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई की है और एक जेई को बर्खास्त कर दिया गया था। दो बिल्डरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

एडीजी भास्कर के नेतृत्व में आज नोएडा आएगा जांच दल 

मेरठ जोन के एडीजी भानु भास्कर के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच दल मंगलवार को नोएडा का दौरा करेगा। एसआईटी में लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता अजय वर्मा और मेरठ के मंडलायुक्त हृषिकेश भास्कर भी शामिल हैं।

दम घुटने से मौत 

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार, लंबे समय तक ठंडे पानी में रहने से युवराज के फेफड़ों में साढ़े तीन लीटर पानी चला गया, जिससे ऑक्सीजन की आपूर्ति रुक गई और दम घुटने से उसकी मौत हो गई। शरीर पर अत्यधिक दबाव पड़ने से हार्ट फेलियर भी हुआ।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *