
आगरा के बाह बटेश्वर पहुंचे कथा वाचक देवकी नंदन ठाकुर ने सोमवार की शाम ब्रह्मलाल जी मंदिर में पूजा की। शिवलिंग पर तलवार के प्रहार के तीन निशान देखे और बोले औरंगजेब ने बटेश्वर में शिव को मिटाने, मंदिर तोड़ने और शिवलिंग को खंड़ित करने के लिए आया था। लेकिन हार कर लौटा था। मंदिर तोड़ने और शिवलिंग को खंड़ित करने के चिन्ह आज भी मौजूद हैं। सच ये है कि इन्होंने सनातनी परंपरा को मिटाने के लिए पहले भी प्रयास हुए थे। अभी भी हो रहे हैं। बांग्लादेश में हिंदू सुरक्षित हों, सनातन बोर्ड बने, सनातन विरोधी ताकतों का अत्याचार न बढ़े, ब्रह्मलाल महाराज से अनुष्ठान में यही आशीर्वाद मांगा है। उन्होंने गौरी शंकर मंदिर में भी पूजा अर्चना की। शिव मंदिर श्रंखला को देखने के बाद बोले कि बटेश्वर और मथुरा का द्वापर युग से जुड़ाव है। कृष्ण की पितृ भूमि एवं उनके दादा सूरसेन की राजधानी रही है। कृष्ण के पिता बसुदेव शौरीपुर बटेश्वर के रहने वाले थे। शिव भक्त थे। कुंती भी यहीं जन्मी। बटेश्वर में यमुना नदी के उल्टे बहाव ने भी उन्हें अचरज में डाल दिया। पूजा अनुष्ठान पुजारी जयप्रकाश गोस्वामी, आचार्य सूर्यकांत गोस्वामी, राकेश वाजपेयी, अशोक गोस्वामी आदि ने कराई।
