तीन दिन से आंधी और बारिश ने अलीगढ़ मंडल के चारों जिलों में 15 फीसदी तक फसल खराब कर दी। पहले आलू में उम्मीद के मुताबिक दाम नहीं मिले, अब गेहूं को लेकर किसानों ने दाना पतला और भूसे का संकट पैदा होने की आशंका जताई है। 19 मार्च को बारिश के बाद अलीगढ़, हाथरस, एटा और कासगंज में कृषि व राजस्व विभाग की संयुक्त टीमों ने जांच में पाया कि जिन किसानों ने हाल फिलहाल पानी में लगाया है, उनकी फसल प्रभावित हुई है। 

चारों जिलों से सामने आए तथ्यों का हवाला देते हुए मंडल के संयुक्त कृषि निदेशक श्रवण कुमार ने कहा कि करीब पांच फीसदी फसल को नुकसान पहुंचा है। हालांकि अलीगढ़ और हाथरस में किसानों इस नुकसान को 10 से 15 फीसदी तक होने का दावा किया है। अकेले अलीगढ़ जिले में इस बार गेहूं का रकबा 2.83 में से 1.89 लाख हेक्टेयर में है। इस हिसाब से करीब 18 से 25 हजार हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई है।

20 मार्च को अलीगढ़ से अतरौली के बीच कई खेतों में छह से सात इंच तक पानी भरा मिला, जबकि बाकी जगहों पर गेहूं की फसल जमीन पर बिछी दिखी। किसानों ने बताया कि पिछले सप्ताह तापमान 37 डिग्री तक पहुंचने पर सिंचाई की गई थी, लेकिन तीन दिन पहले अचानक मौसम बदल गया। पहले तेज आंधी ने फसल गिरा दी, फिर बारिश ने उसे भिगो दिया। 

नतीजतन खेतों में पहले का पानी सूख नहीं पाया और ऊपर से बारिश होने से जलभराव बढ़ गया, जिससे फसल सड़ने का खतरा खड़ा हो गया है। हाथरस कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. अख्तर हुसैन वारसी के मुताबिक, यदि मौसम जल्द साफ नहीं हुआ तो नुकसान बढ़ सकता है। दाने के पतले रहने से बाजार भाव पर भी असर पड़ेगा।



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