गांव में तनाव और दहशत बरकरार
घटना के चार दिन बाद भी गांव में तनाव और दहशत बरकरार है। टोल प्लाजा हो या सरधना की सीमा, गांव के बाहरी छोर से लेकर पीड़ित परिवार की दहलीज तक सिर्फ खाकी वर्दी का पहरा है। मीडिया, बाहरी व्यक्ति और विपक्षी दलों के नेताओं की एंट्री पर पूरी तरह पाबंदी है।
मुख्य रास्तों की बजाय खेतों की पगडंडियों का लेना पड़ रहा सहारा
स्थिति यह है कि ग्रामीणों को घर की जरूरत का सामान लाने के लिए मुख्य रास्तों की बजाय खेतों की पगडंडियों का सहारा लेना पड़ रहा है। वहां भी अगर पुलिस की नजर पड़ गई तो भारी नाराजगी और फटकार झेलनी पड़ती है।
पिछले चार दिनों से ग्रामीण अपने ही गांव में कैद होकर रह गए हैं। चाहे रोज बाहर जाकर नौकरी करने वाले लोग हों या स्कूली बच्चे, पुलिसिया पहरे के चलते सब घरों में दुबके हुए हैं। पीड़ित परिवार में मातम पसरा है लेकिन घर के सदस्यों के अलावा उन्हें ढांढस बंधाने वाला कोई नहीं है।
‘गांव में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में’
पड़ोसी जाना भी चाहते हैं तो पुलिस उन्हें रोक देती है। फिलहाल इस कर्फ्यू जैसे माहौल में ग्रामीणों के लिए एक-दूसरे का हाल जानने का सहारा सिर्फ फोन ही बचा है। वहीं एसपी देहात अभिजीत कुमार का दावा है कि गांव में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से निपटने के लिए पर्याप्त बल तैनात किया गया है।




