UP Congress will start Bharat Jodo Bunkar Sammelan in Uttar Pradesh.

प्रतीकात्मक तस्वीर
– फोटो : सोशल मीडिया

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कांग्रेस ने अल्पसंख्यकों को जोड़ने की मुहिम शुरू कर दी है। चाय पर चर्चा के बाद अब जुलाई में भारत जोड़ो बुनकर सम्मेलन आयोजित करने की तैयारी है। इसके जरिए बुनकरों की बदहाली का मुद्दा उठाया जाएगा। यूपीए सरकार में बुनकरों को दी गईं सहूलियतों से भी वाकिफ कराया जाएगा। सम्मेलन के जरिए खासतौर से अवध और पूर्वांचल में वोटबैंक बढ़ाने की कवायद की जाएगी। सम्मेलन में बुनकरों के पते और मोबाइल नंबर भी इकट्ठा किए जाएंगे, ताकि उन तक निरंतर पार्टी की पहुंच बनी रही।

प्रदेश में गोरखपुर, मऊ, आजमगढ़, अंबेडकरनगर, मेरठ, मिर्जापुर, भदोही, चंदौली, वाराणसी, बस्ती, महराजगंज, देवरिया, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर सहित विभिन्न जिलों में क्षेत्रवार बुनकरों की अच्छी आबादी है। भाजपा पसमांदा मुस्लिमों को जोड़ने के लिए विभिन्न कार्यक्रम कर रही है। ऐसे में कांग्रेस ने बुनकर सम्मेलन की रणनीति बनाई है। 15 जुलाई के बाद वाराणसी या मऊ से इसकी शुरुआत की जाएगी। इन सम्मेलनों में बुनकरों की बदहाली का मुद्दा उठाया जाएगा। उन्हें यह भी बताया जाएगा कि कांग्रेस ही अल्पसंख्यकों की लड़ाई लड़ सकती है। उन्हें वर्तमान में धागे पर लगे जीएसटी सहित विभिन्न तरह की कर वृद्धि से बुनकरों को होने वाले नुकसान से भी वाकिफ कराया जाएगा।

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कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सदस्य इमरान प्रतापगढ़ी ने बताया कि महाराष्ट्र, गुजरात, बिहार सहित विभिन्न राज्यों में बुनकर सम्मेलन शुरू कर दिए गए हैं। अब उत्तर प्रदेश में इसकी तैयारी चल रही है। बुनकर समाज कांग्रेस का परंपरागत वोटबैंक रहा है। इन्हें फिर से पार्टी से जोड़कर लोकसभा चुनाव लड़ा जाएगा। इमरान प्रतापगढ़ी ने आरोप लगाया कि बुनकरों की उपेक्षा होने की वजह से हथकरघा उद्योग पूरी तरह से चौपट हो गया है। बताया कि वर्ष 1995 में देशभर में 65 लाख लोग इससे जुड़े थे, जिसमें 77 फीसदी महिलाएं थीं। उत्तर प्रदेश में ही 21 कताई मिलें थीं, जिनसे बुनकरों को धागा मिलता था। अब सभी मिलें बंद हैं। गोरखपुर में 1990 तक 17 हजार से अधिक हथकरघे थे, अब 100 से भी कम हो गए हैं।

दलित मोहल्लों में हुई चाय पर चर्चा

कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश अध्यक्ष शाहनवाज आलम ने बताया कि अल्पसंख्यक और दलितों को जोड़ने के लिए पार्टी की ओर से कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। 15 से 25 जून तक चलने वाले कार्यक्रम के तहत दलित मोहल्लों की 300 चाय की दुकानों पर चर्चा की जा चुकी है।



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