कानपुर में रुपये लेकर मार्कशीट दिलाने के मामले में किदवईनगर पुलिस के हत्थे चढ़ा शैलेंद्र कुमार मूलरूप से रायबरेली के ऊंचाहार का रहने वाला है। वह गणित से परास्नातक है और लंबे समय तक निजी कॉलेज में गणित का शिक्षक रहा। बाद में विश्वविद्यालयों के बाबूओं से नजदीकी बढ़ने पर बिना पढ़ाई के पास की मार्कशीट दिलाने का ठेकेदार बन जूही गौशाला में शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन नामक से कार्यालय चलाने लगा।
वह मार्कशीट दिलाने का ठेका लेते वक्त गारंटी लेता था कि कहीं भी चेक होने पर मार्कशीट ऑनलाइन दिखेगी। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि साकेतनगर स्थित कविशा अपार्टमेंट में रहने वाले शैलेंद्र ने ऐसा गिरोह बनाया है, जो विश्वविद्यालयों के लालची बाबूओं को ढूंढकर गिरोह से मिलाता। तय रकम पर उनसे मनचाही मार्कशीट या डिग्री बनवाकर ऑनलाइन करा देते।
