चेक गणराज्य के कारोबारी गैंगेला से हुई करीब दो करोड़ की ठगी में शामिल आरोपी हर वारदात की प्लानिंग ऑटो में यात्रा कर बनाते थे। उनकी बातों को सुन अक्सर चालक लालच में आकर साजिश में शामिल हो जाते थे। उनके बैंक खाते, आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेजों का इस्तेमाल ठगी में होता था। यह जानकारी पुलिस और पश्चिम जोन की साइबर सेल की जांच में हुआ है। अब तक 30 से अधिक दस्तावेज मिले हैं, जिनमें ज्यादातर ऑटो चालक या उनके परिजनों के हैं। पुलिस ने गिरोह में शामिल दो अन्य आरोपियों को मुंबई से गिरफ्तार किया है। उनको शनिवार को कोर्ट में पेश किया, जहां से जेल भेज दिया गया।

गैंगेला से दिसंबर 2025 में लगभग दो करोड़ रुपये की ठगी हुई। उन्होंने पुलिस कमिश्नर कार्यालय को 13 जनवरी 2026 को शिकायत के लिए ईमेल भेजा। इसकी जांच डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी को दी गई। डीसीपी पश्चिम ने पनकी पुलिस और साइबर सेल से जांच कराई। आरोपियों ने पनकी की वर्धमान स्टेट नाम से फर्म बनाकर गैंगेला की कंपनी से स्टील रैक का सौदा किया। रुपये लेने के बाद संवाद बंद कर दिया। पनकी इंस्पेक्टर मनोज सिंह भदौरिया ने बताया कि प्रारंभिक जांच में झांसी के अमित ओम प्रकाश शर्मा और नौबस्ता के आकाश कुमार का नाम सामने आया। दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। उनके पास से कई फर्म की मोहर, बैंक, आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेज मिले।

दोनों की निशानदेही पर मुंबई की कांदीवली के रोहित विजय चांचड़ और नौबस्ता पशुपतिनगर के अरविंद महंत यादव को गिरफ्तार किया गया। रोहित विजय चांचड़ और अरविंद महंत यादव को जेल भेज दिया गया है। अमित ओम प्रकाश शर्मा और रोहित विजय चांचड़ साथ में एमबीए करते थे। पहले किसी मल्टीनेशनल कंपनी में कार्य किया, जहां से निकलने के बाद दोनों ठगी के खेल में शामिल हो गए। इंस्पेक्टर के मुताबिक दोनों दोस्त दस्तावेजों के लिए किसी प्रवासी युवकों की तलाश करते थे। इसके लिए ऑटो में यात्रा होती थी। इस दौरान बिजनेस की बात करते थे। दोनों अपनी बात में किसी ऐसे युवक की तलाश करने का जिक्र करते थे, जो जोखिम उठा सकता हो। उनकी बातें सुनकर कई बार चालक तैयार हो जाते थे। इसकी बीच उनके दस्तावेज लेकर फर्म बनाने और बैंक खातों में रुपये मंगवाने का कार्य किया जाता था। उनको रुपये मंगवाने के बदले ढाई से तीन लाख रुपये दिए जाते थे।

पत्नी के इलाज के लिए रुपयों की थी जरूरत

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक अरविंद महंत यादव की पत्नी को गंभीर बीमारी है। उसके इलाज के लिए काफी रुपयों की आवश्यकता पड़ रही थी। अमित और रोहित की बात सुनकर अरविंद महंत यादव तैयार हो गया। इसी तरह से रामकुमार राय का नाम भी सामने आया है। वह भी ऑटो चलाया करता था।

रोहित करता था कंपनियों से डिलिंग

साइबर सेल के प्रभारी शुभम यादव के मुताबिक रोहित विजय चांचड़ विदेश की कंपनियों से डिलिंग करता था, जबकि दस्तावेज बनाने और रुपये ट्रांसफर कराने की जिम्मेदारी अमित ओम प्रकाश शर्मा की थी। दोनों के साथ अन्य युवकों के जुड़े होने की आशंका है। पुलिस उन सभी की तलाश में जुट गई है।



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