Muzaffarnagar: किसानों की समस्याओं को लेकर जिले में एक बार फिर किसान आंदोलन की गर्माहट बढ़ गई है। किसान मजदूर संगठन के बैनर तले सैकड़ों किसानों और संगठन के पदाधिकारियों ने कचहरी परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपकर किसानों ने अपनी मांगों को सामने रखा। प्रदर्शन में संगठन के अध्यक्ष ठा. पूरण सिंह और जिलाध्यक्ष दीपक सोम ने किसानों की समस्याओं को जोरदार तरीके से उठाया।
प्रदर्शन के प्रमुख मुद्दे
इस प्रदर्शन में किसानों ने कई प्रमुख समस्याओं को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की। इनमें सबसे बड़ी समस्याएं थीं:
- बिजली की समस्या: किसानों ने जर्जर बिजली तारों और नियमित बिजली आपूर्ति की समस्या को उठाया। उन्होंने मांग की कि जर्जर तारों को जल्द से जल्द बदला जाए और ग्रामीण क्षेत्रों में 24 घंटे बिजली उपलब्ध करवाई जाए।
- सिंचाई की समस्या: किसानों ने सिंचाई के लिए नहरों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की। उनका कहना था कि टेल क्षेत्र तक पानी नहीं पहुंचने के कारण उन्हें अपनी फसलों की सिंचाई के लिए निजी पंपिंग सेट पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे उनकी लागत बढ़ जाती है।
- गन्ना मूल्य बढ़ाने की मांग: गन्ना किसानों ने गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी और बकाया भुगतान में तेजी लाने की मांग की। उनका आरोप था कि चीनी मिलें समय पर भुगतान नहीं करतीं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति खराब होती जा रही है।
- खाद और बीज की कमी: किसानों ने आरोप लगाया कि खाद और बीज की समय पर आपूर्ति नहीं हो रही है। इसके अलावा, खाद की कालाबाजारी भी एक बड़ी समस्या बन गई है।
किसान मजदूर संगठन की भूमिका
किसान मजदूर संगठन, जो पिछले कई वर्षों से किसानों की समस्याओं को उठाने में सक्रिय है, ने इस बार भी अपनी सशक्त भूमिका निभाई। संगठन के अध्यक्ष ठा. पूरण सिंह ने कहा, “किसानों की समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। अगर सरकार जल्द ही हमारी मांगों को नहीं मानती, तो हमें बड़े स्तर पर आंदोलन करना पड़ेगा।”
जिलाध्यक्ष दीपक सोम ने भी कहा, “सरकार ने किसानों को सिर्फ चुनावी वादों तक सीमित कर दिया है। हमें हमारे अधिकार चाहिए, न कि झूठे वादे।”
ग्रामीण क्षेत्रों में समस्याओं की जमीनी हकीकत
मुजफ्फरनगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को सिंचाई, बिजली, और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। प्रदर्शन में शामिल किसानों ने बताया कि नहरों की सफाई न होने के कारण उनमें पानी का प्रवाह रुक गया है। वहीं, बारिश के मौसम में खेतों तक पहुंचने वाली सड़कें कीचड़ से भर जाती हैं।
किसानों का आक्रोश
प्रदर्शन के दौरान किसानों का आक्रोश साफ नजर आया। उन्होंने नारेबाजी करते हुए कहा, “किसान मर रहे हैं और सरकार सो रही है।” किसानों का कहना है कि उनकी आवाज को दबाया जा रहा है।
सरकार की प्रतिक्रिया
प्रदर्शन के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने किसानों से बातचीत की और उनकी मांगों को मुख्यमंत्री तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। हालांकि, किसानों ने साफ कर दिया है कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।
देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
प्रदर्शन के अंत में किसान मजदूर संगठन ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने उनकी मांगों को अनदेखा किया, तो यह आंदोलन सिर्फ मुजफ्फरनगर तक सीमित नहीं रहेगा। संगठन ने कहा कि वह अन्य जिलों और राज्यों में भी आंदोलन की लहर पैदा करेगा।
विशेषज्ञों की राय
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों की समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं और इन्हें सुलझाने के लिए एक समग्र नीति की आवश्यकता है। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि गन्ना किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की प्रणाली को और मजबूत किया जाए और सिंचाई के लिए आधुनिक तकनीकों को अपनाया जाए।
निष्कर्ष नहीं, नई शुरुआत
मुजफ्फरनगर में किसानों का यह प्रदर्शन सिर्फ एक चेतावनी नहीं, बल्कि उनकी समस्याओं का समाधान खोजने का एक मजबूत कदम है। यह देखना होगा कि सरकार इस पर क्या कदम उठाती है। किसान संगठन ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर उनकी मांगे नहीं मानी गईं, तो आंदोलन रुकने वाला नहीं है।
