जिस बेटे को गोद में खिलाया था वही मेरी गोद में हमेशा के लिए सो रहा था। आज भी उस मंजर को याद करती हूं तो रूह कांप उठती है। घर की दीवारें, कानपुर की सड़कें बेटे की याद दिलाती थीं। उसकी यादें जीने नहीं दे रही थीं इसलिए कानपुर छोडक़र सूरत चली गई। मुझे न्याय तब मिलेगा जब तीनों फांसी पर लटकेंगे। जैसे मेरे बच्चे को मारा, वैसे इनका भी गला घुटना चाहिए। ये बातें कोर्ट का फैसला सुनने सूरत से आईं कुशाग्र की मां सोनिया ने कहीं(
सोनिया ने बताया कि 13 साल का छोटा बेटा और पांच माह की बच्ची है। सूरत में पति का व्यापार है। बच्चों को लेकर अब वहीं शिफ्ट हो गई हूं। बेटे की यादें तो जीवनभर पीछा नहीं छोड़ेंगी लेकिन शहर छोड़ने से दर्द जरूर कम हुआ है। मुकदमे की सुनवाई के दौरान जब भी कानपुर आना होता था बेटे की यादें ताजा हो जाती थीं। कोर्ट में गवाही के दौरान वकीलों के सवाल जख्मों पर नश्तर की तरह चुभते थे।
