साइबर जालसाज कॉल मर्ज करके लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। वह बड़ी चालाकी से कॉल को मर्ज कराकर खाते से रकम निकाल लेते हैं। भुक्तभोगी आसानी से इस धोखाधड़ी को समझ नहीं पाते। बैंक खाता चेक करने पर उनको इसका पता चलता है। साइबर पुलिस तक कई मामले पहुंच चुके हैं, इनमें एक ही तरीके से धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया है।

कॉल मर्ज से ठगी

साइबर विशेषज्ञ डा. राजीव त्रिपाठी बताते हैं कि जालसाज सीधे ओटीपी पूछने के बजाय अब कॉल मर्ज के तरीके का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मोबाइल यूजर को एक अनजान नंबर से कॉल आती है। कॉल करने वाला व्यक्ति परिचित होने का दावा करते हुए किसी न किसी बहाने उसे तुरंत कॉल मर्ज करने को कहता है। यह दूसरी कॉल किसी दोस्त का नहीं बल्कि उसके बैंक का होता है। साइबर जालसाज उसी समय वन-टाइम पासवर्ड के लिए सेट किया हुआ होता है। कॉल के मर्ज होते ही साइबर जालसाज को ओटीपी मिल जाती है। इसके बाद चंद मिनट में वह पूरा खाता खंगाल डालता है।

सीओ साइबर रामवीर सिंह का कहना है कि इस तरह की धोखाधड़ी से बचने के लिए पुलिस लगातार लोगों को जागरूक करती है। शिकायत मिलने पर कार्रवाई भी करती है।

इस तरह धोखाधड़ी से बचें

किसी भी अज्ञात नंबर से आने वाली कॉल को मर्ज न करें।

अंजान नंबर से कॉल करने वाला अगर कॉल मर्ज करने के लिए कहता है तो तुरंत सावधान हो जाएं। कॉल काट दें।

बैंक में ऑनलाइन पैसा निकालने की लिमिट सेट करें।

साइबर फ्रॉड का शिकार होने पर तुरंत 1930 पर फोन कर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। देरी होने पर पैसा वापस मिलने में परेशानी होती है।



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