Khatauli murder case ने मुजफ्फरनगर जिले में सनसनी फैला दी है। गंगनहर के किनारे मिले एक अज्ञात महिला के शव से शुरू हुई यह कहानी महज 30 घंटे में पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के बाद एक खौफनाक साजिश और रिश्तों के काले सच में बदल गई। थाना खतौली पुलिस, एसओजी और सर्विलांस टीम की तेज़ और सटीक कार्रवाई ने न सिर्फ आरोपी को गिरफ्तार किया, बल्कि उस पूरी योजना को भी उजागर कर दिया, जिसने एक महिला की जिंदगी को नहर की पटरी तक पहुंचा दिया।


🔴 गंगनहर किनारे मिला शव, इलाके में मचा हड़कंप

14 जनवरी की सुबह थाना खतौली पुलिस को सूचना मिली कि गंगनहर के किनारे एक महिला का शव पड़ा हुआ है। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने इलाके को घेरकर जांच शुरू की। कुछ ही समय में मृतका की पहचान ममता पत्नी कृष्णपाल उर्फ कालिया, निवासी मोहल्ला तगान होली चौक, थाना खतौली, मुजफ्फरनगर के रूप में हुई।

घटना की खबर फैलते ही इलाके में दहशत और सवालों का माहौल बन गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था, वहीं ग्रामीणों ने जल्द से जल्द सच सामने लाने की मांग की।


🔴 वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी, विशेष टीमों का गठन

मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर पुलिस महानिदेशक मेरठ जोन और पुलिस उपमहानिरीक्षक सहारनपुर परिक्षेत्र के निर्देशन में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा ने खुद घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने निर्देश दिए कि इस मामले का जल्द और ठोस खुलासा किया जाए।

इसके बाद थाना खतौली पुलिस, एसओजी और सर्विलांस की संयुक्त टीम बनाई गई। पुलिस अधीक्षक नगर सत्यनारायण प्रजापत और क्षेत्राधिकारी खतौली राम आशीष यादव के पर्यवेक्षण में टीमों ने तकनीकी और जमीनी स्तर पर जांच शुरू की।


🔴 मुखबिर की सूचना बनी कड़ी, आरोपी की गिरफ्तारी

जांच के दौरान पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि घटना को अंजाम देने वाला व्यक्ति गंगनहर पटरी पर दूध प्लांट वाले रास्ते के पास कहीं जाने की फिराक में खड़ा है। पुलिस टीम ने तुरंत घेराबंदी की और संदीप नामदेव पुत्र वेदप्रकाश को मौके से गिरफ्तार कर लिया।

इस तरह Khatauli  murder case का महज 30 घंटे में सफल अनावरण हो गया, जिसने पुलिस की सक्रियता और रणनीति की सराहना बटोरी।


🔴 बरामदगी: बेडशीट, रेहड़ा और अहम सुराग

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी के कब्जे से—

  • घटना में प्रयुक्त बेडशीट

  • शव ले जाने में इस्तेमाल किया गया रेहड़ा

  • अन्य महत्वपूर्ण सामान
    बरामद किया।

ये बरामदगियां केस की कड़ी को मजबूत करने वाले अहम सबूत बन गईं।


🔴 आरोपी का कबूलनामा: प्रेम, शक और साजिश की कहानी

प्रारंभिक पूछताछ में संदीप नामदेव ने जो कहानी बताई, उसने पुलिस अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। उसने बताया कि वर्ष 2012 में उसकी पत्नी की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद वह वर्मा टिफिन सेंटर से खाना मंगवाता था, जहां ममता काम करती थी।

यहीं से दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई, जो धीरे-धीरे फोन कॉल और फिर निजी मुलाकातों तक पहुंच गई। ममता कभी-कभी उसके घर आकर खाना बनाने लगी। इसी दौरान दोनों के बीच शारीरिक संबंध बने और ममता उससे पैसे भी लेने लगी।


🔴 शक की चिंगारी और 5 हजार रुपये की मांग

संदीप ने बताया कि उसे पता चला कि ममता और भी लोगों से फोन पर बात करती है। इस बात को लेकर उनके बीच झगड़े शुरू हो गए। इसी बीच उसने ममता को बताया कि उसने अपना एक प्लॉट 16 लाख रुपये में बेचा है।

10 जनवरी 2026 को ममता ने उससे अपने नाती के नामकरण के लिए 5 हजार रुपये मांगे। संदीप को शक हुआ कि वह उसे धोखा दे रही है और पैसे ऐंठने की कोशिश कर रही है। यहीं से उसने ममता को खत्म करने का मन बना लिया।


🔴 स्लीपिंग पिल से लेकर नहर तक: खौफनाक अंजाम

संदीप ने ममता को घर बुलाया और चाय में नींद की गोली मिला दी। जब उसे लगा कि ममता पूरी तरह नशे में है, तो उसने उसके मुंह और नाक को दबाकर उसकी सांस रोक दी। बाद में उसने सैलोटेप से चेहरा लपेटकर यह सुनिश्चित किया कि वह बच न पाए।

मृत्यु के बाद उसने शव को अपने घर के सामने खाली प्लॉट में खड़े रेहड़े में रखा, बेडशीट से ढका और नहर में फेंकने के लिए ले गया। लेकिन शव भारी होने के कारण वह नहर में नहीं फेंक सका और शव रेलिंग के पास फंस गया।


🔴 सबूत मिटाने की कोशिश, मोबाइल और पर्स का खेल

आरोपी ने ममता का पर्स अलकनंदा नहर पुल से आगे फेंक दिया। उसके मोबाइल से उसने एक परिचित को कॉल कर 30-35 सेकंड तक बात करने का नाटक किया, ताकि शक किसी और पर जाए। इसके बाद मोबाइल तोड़कर नहर में फेंक दिया।


🔴 पुलिस टीम की भूमिका और सराहना

इस पूरे ऑपरेशन को थाना प्रभारी दिनेश चंद्र के नेतृत्व में अंजाम दिया गया। टीम में निरीक्षक राजीव कुमार, उपनिरीक्षक अजय गौड़ (एसओजी), उपनिरीक्षक अनिल तोमर, हेड कांस्टेबल विपिन, जितेंद्र, सत्येंद्र और मनीष त्यागी शामिल रहे।

वरिष्ठ अधिकारियों ने टीम की तेज़ और समन्वित कार्रवाई की सराहना की और कहा कि यह ऑपरेशन जिले में कानून-व्यवस्था की मजबूती का उदाहरण है।


🔴 इलाके में चर्चा, लोगों में सुकून

घटना के खुलासे के बाद स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली। ग्रामीणों का कहना है कि इतनी जल्दी सच्चाई सामने आना पुलिस की सतर्कता का प्रमाण है। हालांकि, इस घटना ने समाज में रिश्तों और भरोसे को लेकर गहरी चिंता भी पैदा कर दी है।


🔴 आगे की कानूनी प्रक्रिया और जांच

पुलिस अब आरोपी के आपराधिक इतिहास की जांच कर रही है और सभी बरामद साक्ष्यों को केस डायरी में शामिल किया गया है। अदालत में चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी जारी है।


🔴 कानून और इंसाफ का संदेश

Khatauli murder case सिर्फ एक अपराध का खुलासा नहीं, बल्कि यह संदेश भी है कि चाहे साजिश कितनी भी चालाकी से रची जाए, सच देर-सबेर सामने आता ही है।


Khatauli murder case ने यह साबित कर दिया है कि पुलिस की तेज़ कार्रवाई और तकनीकी निगरानी से अपराधियों के लिए बच निकलना मुश्किल होता जा रहा है। 30 घंटे में हुआ यह खुलासा केवल एक गिरफ्तारी नहीं, बल्कि समाज के लिए यह भरोसा है कि न्याय की राह भले लंबी हो, लेकिन मंज़िल तय है।

 



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