इटावा। मुझे उस दिन सर्वाधिक गर्व महसूस होगा, जिस दिन हमारा भारत खेल देश के रूप में पहचाना जाएगा। यह बात रविवार को दिल्ली पब्लिक स्कूल के वार्षिक खेल समारोह में शामिल होने आईं देश की सर्वश्रेष्ठ बैडमिंटन खिलाड़ी तथा ओलंपिक राष्ट्रमंडल, वर्ल्ड और एशियन चैंपियन साइना नेहवाल ने कही।
करीब तीन घंटे से ज्यादा दिल्ली पब्लिक स्कूल के प्रांगण में बच्चों और खिलाड़ियों के बीच रही साइना नेहवाल ने कहा कि उन्होंने बचपन में जब बैडमिंटन खेलना शुरू किया था। तब न तो उनका कोई रोल मॉडल था और न ही उनके पास कोई प्रशिक्षक ही था। लेकिन उनके माता-पिता की प्रेरणा उनके साथ थी। धीरे-धीरे वह बैडमिंटन में पारंगत होती गईं। जब 2010 में वह ओलंपिक में पहली बार पदक जीतने से चूक गईं तो वह रातभर रोई थीं, लेकिन सुबह से ही नई ऊर्जा के साथ अभ्यास में जुट गईं थीं। उन्होंने देश का नाम गौरवान्वित करने में कोई और कसर नहीं छोड़ी।
वह बोली कि आज के बच्चों के लिए रोल मॉडल बनने के लिए खेलों में तेंदुलकर, विराट धोनी आदि खिलाड़ी हैं और मेरे से भी बच्चे प्रेरणा ले सकते हैं। लोगों में अभी भी अपने बच्चों को डॉक्टर, इंजीनियर आईएएस और पीसीएस बनने की ललक है, लेकिन अब बच्चे खिलाड़ी बनकर बहुत ऊंचाई पा सकते हैं। न केवल अपने परिवार का बल्कि अपने स्कूल और देश का नाम गौरवान्वित कर सकते हैं। मंच से साइना नेहवाल का स्वागत करते हुए एसएमजीआई ग्रुप और डीपीएस के चेयरमैन डॉ. विवेक यादव ने कहा कि साइना ने अपने जीवन में कभी भी हार नही मानी है।
इस दौरान वाइस चेयरमैन डॉ. प्रीति यादव, प्रिंसिपल भावना सिंह, सिटी कोऑर्डिनेटर सीबीएसई एवं डायरेक्टर प्रिंसिपल संत विवेकानंद डॉ. आनंद, मदन हॉस्पिटल के प्रबंध निदेशक डॉ. विकास यादव, फार्मेसी कालेज के डायरेक्टर डॉ. उमाशंकर शर्मा, नर्सिंग कालेज के निदेशक डॉ शशि शेखर त्रिपाठी, संत विवेकानंद सीनियर सेकेंडरी भिंड की निदेशक डॉ. सीमा त्रिपाठी, रजिस्ट्रार परविंदर सिंह, एसएमजीआई के सभी स्कूलों और कॉलेजों के डायरेक्टर और प्रधानाचार्य तथा इटावा सहोदय स्कूलों के प्रिंसिपल और विद्यालय स्टाफ ने उनका जबरदस्त अभिनंदन किया। साइना नेहवाल के साथ उनकी मां ऊषा नेहवाल भी आई थीं।
उत्तर भारत में स्पोर्ट्स एकेडमी की कमी: नेहवाल
इटावा। साइना नेहवाल ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि उत्तर भारत में स्पोर्ट्स एकेडमी की कमी काफी खेलती है। क्रिकेट को छोड़कर अन्य खेलों में यह कमी खिलाड़ियों को अवसर नहीं दिला पाती है। उन्होंने कहा कि स्पोर्ट्स एकेडमी खुले तो देश में खेलों में प्रतिभाएं तेजी से निखर कर आएं। कहा कि चाइना, जापान जैसे में खेलों में प्रतिभाएं इसलिए ही अपने देश को गौरवान्वित कर पाती है। कहा कि सपने तो सभी के होते हैं। उन सपनों को साकार करने के लिए मेहनत व लगन होनी चाहिए। तभी सपने साकार हो सकते हैं। यह पूछे जाने पर कि बैडमिंडन में आप जिस मुकाम पर पहुंची। वहां आपकी विरासत को कौन सहज कर रख सकता है। इस पर उन्होंने कहा कि कई अच्छे प्लेयर है विरासत के लिए। किसी एक का नाम लेना उचित नहीं होगा। (संवाद)
