शुरुआत में बुंदेलखंड के दस हजार से अधिक विद्यार्थियों को लाभमिलेगा। व्योमिका फाउंडेशन के दिलीप त्रिपाठी के अनुसार, महोबा से शुरू हुई यह पहल ग्रामीण और शहरी शिक्षा के बीच की दूरी कम करेगी।
बच्चों को इसरो जाने का मौका
एक वर्ष के स्पेस शिक्षा पाठ्यक्रम में व्यावहारिक प्रशिक्षण पर विशेष जोर रहेगा। वार्षिक मूल्यांकन के माध्यम से विद्यार्थियों की प्रगति की नियमित समीक्षा होगी। बच्चों को समय-समय पर इसरो के शोध केंद्र जाकर सीखने का मौका भी मिलेगा।
ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद केंद्र सरकार ने देश की सुरक्षा व्यवस्था को नया रूप देना शुरू कर दिया है। सरकार ने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण मेरठ छावनी में देश का पहला समर्पित मानव रहित विमान (यूएवी) और ड्रोन रनवे विकसित करने की तैयारी की है। दिल्ली के निकट होने के कारण मेरठ में इस परियोजना के निर्माण को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे देश की हवाई निगरानी को मजबूती मिलेगी। परियोजना के पूरा होने में लगभग सात वर्ष लगने का अनुमान है।
युद्धों के लिए रनवे की जरूरत
विशेषज्ञ बताते हैं कि आधुनिक विश्व में बुद्ध के तौर-तरीके बदल गए हैं। इसलिए भविष्य के युद्धों के लिए इस प्रकार के रनवे की जरूरत पड़ेगी। विशेष तौर पर ड्रोन और रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट के लिए रनवे का डिजाइन तैयार किया गया है। यहां ड्रोन उड़ाने का प्रशिक्षण भी मिलेगा।
आपदा के समय भी मिलेगा फायदा
ड्रोन रनवे का प्रयोग सैन्य जरूरतों, आपदा प्रबंधन, सैन्य निगरानी, प्राकृतिक आपदा के समय राहत ब बचाव कार्यों और दूरदराज के इलाकों में आवश्यक सामग्री पहुंचाने में हो सकेगा। रनवे की लंबाई 2110 मीटर और चौड़ाई 45 मीटर होगी। इस रनवे पर सी-295 और सी-130 जैसे परिवहन विमानों के साथ रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट का संचालन हो सकेगा।




