Gorakhpur riots Court gave five minors a chance to reform

सांकेतिक तस्वीर।
– फोटो : सोशल मीडिया।

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वर्ष 2007 में गोरखपुर दंगे के आरोपी बनाए गए शमीम को मंगलवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई, लेकिन उसके पिता को 11 साल पहले 2012 में ही सजा सुनाई जा चुकी है। बहूभोज से घर लौट रहे राजकुमार अग्रहरि की हत्या के बाद शहर में दंगा भड़क गया था।

इस मामले में दोषी पिता को जब सजा सुनाई गई थी तो वह जेल में था, लेकिन शमीम जमानत पर बाहर आ गया था। इस वजह से उसकी सजा की प्रक्रिया रुक गई थी। अभी 14 सितंबर 2023 को पुलिस ने फरारी के 16 साल बाद शमीम को गिरफ्तार कर जेल भिजवाया था, जिसके बाद उसे सजा सुनाई गई है।

इस प्रकरण में पांच अन्य आरोपी भी बनाए गए थे, लेकिन वह नाबालिग थे। जिस वजह से कोर्ट ने कानून के हिसाब से उन्हें कम सजा देते हुए सुधरने का मौका दे दिया था।

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