एक भी टीका छूटा, सुरक्षा चक्र टूटा। संक्रामक रोग उन्मूलन के इस नारे की जमीनी हकीकत बुधवार को स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष और मिशन निदेशक डॉ. पिंकी जोवल की समीक्षा में सामने आई। आगरा और अलीगढ़ मंडल में टीकाकरण में लापरवाही बरती जा रही है। बच्चों को खसरा के टीके नहीं लग रहे। फिरोजाबाद में हालत सबसे खराब मिले। दस दिन में टीकाकरण और 30 दिन में सभी व्यवस्थाएं सुधारने की चेतावनी दी गई।

मंडलायुक्त सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में अपर मुख्य सचिव को सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति खराब मिली। उन्होंने कहा किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। उधर, बच्चों का टीकाकरण नहीं होने पर भड़की मिशन निदेशक डॉ. पिंकी जोवल ने फिरोजाबाद के सीएमओ को फटकार लगाई। यहां 70 प्रतिशत तक बच्चों को टीकाकरण नहीं हुआ। दोनों मंडलों में खसरे के 1,174 मामले दर्ज हुए हैं। फिर भी टीकाकरण में लापरवाही हो रही है। डॉ. जोवल ने अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि एएनएम स्तर तक व्यक्तिगत निगरानी की जाए। हर बच्चे का टीकाकरण सुनिश्चित होना चाहिए।

स्टाफ की कमी पर बोलीं निदेशक, 15 दिन में बनाओ एसओपी

बैठक में स्वास्थ्य इकाइयों में स्टाफ की कमी और असंतुलन का मुद्दा उठा। मिशन निदेशक डॉ. जोवल ने कहा कि कहीं जरूरत से ज्यादा फार्मासिस्ट तैनात हैं, तो कहीं एक भी नहीं है। इस विसंगति को दूर करने के लिए 15 दिनों के भीतर एसओपी बनाई जाए। चिकित्सक, फार्मासिस्ट और आउटसोर्स कर्मियों की तैनाती मरीजों की संख्या के हिसाब से करने के निर्देश दिए हैं।

अस्पतालों का हाल बदलने के लिए 24 घंटे की मोहलत

एटा, मैनपुरी, मथुरा और हाथरस के अस्पताल में सिटीजन चार्टर, सुझाव बॉक्स और साइनेज बोर्ड लगाने के निर्देश दिए। अधिकारियों को 24 घंटे के भीतर कार्य पूर्ण कर फोटो भेजने को कहा है। लापरवाही पर संबंधित का वेतन रोकने और कार्रवाई की चेतावनी दी गई। अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने कहा कि चिकित्सा अधिकारियों को प्रेरित भी किया। कहा कि सफाई कर्मचारी से लेकर सीएमएस तक सभी को समर्पित भाव से रोगियों की सेवा करनी चाहिए। उन्होंने सीएमओ को निर्देश दिया कि वे प्रतिमाह कम से कम दो आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का भौतिक सत्यापन करें।

बैठक से पहले कराया था स्वास्थ्य सेवाओं का सर्वे

आगरा और अलीगढ़ मंडल की समीक्षा से पहले अपर मुख्य सचिव और मिशन निदेशक ने जिला स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं का सर्वे कराया था। सर्वे में मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों और पीएचसी की जांच की गई। फीडबैक में अधिकांश लाभार्थियों ने संतुष्टि व्यक्त की, लेकिन अग्निशमन सुरक्षा, बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण और दवाओं की उपलब्धता नहीं मिली। इसके बाद बुधवार को समीक्षा की गई। बैठक में सचिव रितु माहेश्वरी, विशेष सचिव धीरेंद्र सिंह सचान, महानिदेशक डॉ. रतन पाल सिंह आदि मौजूद रहे।

 



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