
बाएं से आरोपी केदारनाथ और हर्ष। (फाइल)
– फोटो : अमर उजाला।
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गोरखनाथ मंदिर के पते पर योगी कार्पोरेशन ग्रुप ऑफ इंडिया नाम से फर्जी संस्था का पंजीकरण कराकर जालसाजी करने वाले आरोपी गाजियाबाद से परिचय पत्र को छपवाते थे। 1100 रुपये शुल्क खाते में मंगवाने के बाद परिचय पत्र कोरियर से भेजते थे। वहीं, जनता दर्शन में लोगों को भेजकर वसूली करने का भी जालसाजों ने एक तरीका निकाल लिया था।
जालसाज गोरखपुर जिले के बाहर के लोगों को मदद के नाम पर फंसाते थे और गोरखनाथ मंदिर के सामने की सेल्फी भेजकर भरोसे में लेते थे। अब पुलिस दोनों ठगों के मोबाइल नंबरों के सीडीआर की मदद से जांच को आगे बढ़ा रही है। फिलहाल, सचिवालय के कर्मचारी और लखनऊ के कथित पत्रकार के भूमिका की जांच की जा रही है।
पुलिस ने गाजियाबाद के योगी हर्ष और महराजगंज के योगी केदारनाथ से पूछताछ के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है। पुलिस ने दोनों के मोबाइल फोन से मिले दस्तावेज और पास से मिले प्रार्थना पत्रों की जांच कर ही है। अब तक की जांच में सामने आया है कि दोनों ठग प्रदेश के हर जिले में अपना जाल फैला लिए थे।
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ये लोग जिसे पदाधिकारी बनाते थे, उसे कभी भी अपने कार्यालय आने को नहीं कहते थे, क्योंकि कार्यालय का जो पता दिया गया था। उन्हें डर था कि अगर कोई कार्यालय जाएगा तो भंडाफोड़ हो सकता है। इसी वजह से ऑनलाइन ही रुपयों की लेनदेन करने के बाद परिचय पत्र को कोरियर से भेज दिया जाता था। इसके लिए महज 11 सौ रुपये वसूले जाते थे। अब मुख्यमंत्री की संस्था का इतने रकम में सदस्य बनने की चाह में लोग ठगों की जालसाजी की शिकार हो जाते थे।
