बिना कारोबार किए कागजों में बनी फर्म के सहारे जीएसटी पोर्टल से आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) के 4.5 करोड़ रुपये हड़पने के आरोप में कोतवाली पुलिस ने दिल्ली के समयपुर बादली निवासी नीरज रंजन गुप्ता को गिरफ्तार किया है। उसने आईटीसी में गोलमाल करने के लिए गिरोह बना रखा था। पांच साल से सरकारी खजाने को चपत लगा रहा था।


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पांच साल से चल रहा था खेल

सीओ सिटी लक्ष्मीकांत गौतम ने बताया कि बीते 18 दिसंबर को स्टेट जीएसटी के वरिष्ठ सहायक देवेंद्र पटेल ने कोतवाली में काजल इंटरप्राइजेज नामक फर्म के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। बताया था कि इस नाम की फर्म के सहारे बिना कोई वास्तविक व्यापार किए बोगस रिटर्न दाखिल कर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। जांच में पुलिस को कई चौंकाने वाली बात मालूम चली। यह खेल पिछले करीब पांच साल से चल रहा था। फर्म में कई लोगों के नाम भी सामने आए। फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद आरोपी के खिलाफ कई धाराएं भी बढ़ाई गईं। नीरज रंजन ने पूछताछ में बताया कि दिल्ली के मॉडल टाउन निवासी ऋतेश जैन एवं उसके पिता अशोक जैन ने कूटरचित दस्तावेजों के सहारे जीएस इंटरनेशनल नाम से फर्जी फर्म बना रखी थी। इसकी मदद से लगभग 24 करोड़ रुपये का काल्पनिक लेनदेन दिखाकर फर्जी इनवॉइस बिल तैयार किया गया। इसके बाद अब तक 4.5 करोड़ रुपये का आईटीसी क्लेम लिया गया।

व्हाट्सएप चैट ने खोला राज

पुलिस ने आरोपी नीरज रंजन के लैपटॉप एवं मोबाइल को कब्जे में लेकर उसकी जांच की। मोबाइल खंगालने पर ऋतेश एवं अशोक जैन से व्हाट्सएप पर बातचीत से पूरी साजिश उजागर हो गई। इनके बीच लंबी व्हाट्सएप चैट पुलिस ने बरामद की। तीनों के बीच करोड़ों रुपये की आईटीसी हड़पने को लेकर बातचीत होती पाई गई। पुलिस अफसरों का कहना है कि इस खेल में कई अन्य लोग भी जुड़े हैं। पुलिस उनको तलाशने में जुटी है।



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