
शिवपाल सिंह यादव और ओम प्रकाश राजभर (फाइल फोटो)
– फोटो : अमर उजाला
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राजनीतिक उलटफेर के दौर में सपा के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल यादव ने सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर और निषाद पार्टी अध्यक्ष संजय निषाद पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि ये दोनों नेता हल्के लोग हैं। इनकी बात का कोई भरोसा नहीं है। राजभर के भाजपा में जाने की अटकलों के बीच शिवपाल सिंह ने दोनों नेताओं पर निशाना साधा। शिवपाल ने कहा कि ओमप्रकाश राजभर और संजय निषाद चुनाव आते ही दुकान चलाने लगते हैं। हम ऐसे लोगों से मिलते भी नहीं हैं। उन्होंने बसपा पर निशाना साधा। कहा, कि बसपा भाजपा की बी टीम है। मायावती को भाजपा से डर लगता है। समाजवादियों का इतिहास रहा है कि हम डरते नहीं हैं।
क्या बसपा को तोड़ेंगे? पत्रकारों के इस सवाल पर शिवपाल ने कहा कि एक बार तो तोड़ ही चुके हैं। समय आने पर देखा जाएगा। महाराष्ट्र की राजनीति पर सपा नेता बोले कि शरद पवार बिल्कुल नेताजी (मुलायम सिंह) जैसी राजनीति करते हैं। महाराष्ट्र में उनकी जल्द वापसी होगी। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2024 की रणनीति अखिलेश के साथ मिलकर बनाएंगे और भाजपा को उत्तर प्रदेश में हराने का काम करेंगे।
सपा में खुद नहीं हैं शिवपाल की कोई हैसियत : अरुण राजभर
लोकसभा चुनाव की तैयारियों के साथ ही गठबंधन को लेकर सियासी दलों के बीच जुबानी जंग भी तेज होती जा रही है। खासकर सपा और सुभासपा के बीच एक दूसरे के खिलाफ तल्ख बयानबाजी से सियासी माहौल गरमा गया है। ताजा मामला सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के भाजपा के साथ जाने को लेकर चल रही अटकलों को लेकर है। इस पर दोनों दलों के नेताओं ने एक दूसरे पर तीखा हमला किया है ।
सपा महासचिव शिवपाल के बयान पर पलटवार करते हुए सुभसपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण राजभर ने ट्विटर के जरिए कहा कि चाचा शिवपाल की खुद ही सपा में कोई हैसियत नहीं रह गई है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि शिवपाल इतने ताकतवर थे कि अपनी एक पार्टी तो बनाई, लेकिन उसे चला नहीं पाए। बाद में जिस जिस भतीजे ने जलील और अपमानित करते हुए धक्का मारकर भगाया था, फिर भी सपा के साथ चले गए। अरुण ने कहा कि जिस उम्मीद और लालच में चाचा सपा में गए थे, वह उन्हें हासिल नहीं हुआ। भतीजे ने उन्हें उनकी हैसियत बताने के लिए चाचा की पार्टी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (प्रसपा) के किसी भी पदाधिकारी को सपा में सम्मान नहीं दिया। सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर को हल्का बताने वाले शिवपाल को खुद समझना चाहिए कि सपा में वह खुद हल्के हो चुके हैं, जबकि ओपी राजभर की अपनी खुद का वजूद और हैसियत है ।
लोकसभा चुनाव की तैयारियों के साथ ही गठबंधन को लेकर सियासी दलों के बीच जुबानी जंग भी तेज होती जा रही है। खासकर सपा और सुभासपा के बीच एक दूसरे के खिलाफ तल्ख बयानबाजी से सियासी माहौल गरमा गया है। ताजा मामला सुभासपा के भाजपा के साथ जाने को लेकर चल रही अटकलों को लेकर है।
