राज्यपाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज ‘न्यू इंडिया’ के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। विगत वर्षों में राज्य ने विकास के नए मानक स्थापित किए हैं, जिससे जनजीवन सुगम हुआ है तथा रोजगार, निवेश और नवाचार के नए अवसर सृजित हुए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अब केवल देश का सबसे बड़ा राज्य नहीं, बल्कि विकास का अग्रदूत बनकर उभर रहा है।

राज्यपाल ने कहा कि भविष्य की तकनीक आज उत्तर प्रदेश में आकार ले रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन, रोबोटिक्स और सेमीकंडक्टर विनिर्माण में राज्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। रक्षा औद्योगिक गलियारे के माध्यम से उत्तर प्रदेश रक्षा निर्माण का प्रमुख केंद्र बन रहा है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करेगा। राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश की आत्मा आज भी गांवों में बसती है। फल एवं सब्जी उत्पादन में अग्रणी उत्तर प्रदेश देश की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ है। ‘एक जिला एक उत्पाद’ योजना के माध्यम से स्थानीय शिल्प और उत्पादों को वैश्विक पहचान मिल रही है। उन्होंने सामूहिकता और जनभागीदारी के महत्व प्रकाश डालते हुए तमसा नदी पुनर्जीवन, सामूहिक रसोई तथा स्वच्छता अभियानों का उल्लेख किया और कहा कि जब समाज एक साथ चलता है, तब असंभव भी संभव हो जाता है। राज्यपाल ने कहा कि भारत आज विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और युवाओं के लिए असीम अवसर उपलब्ध हैं।

स्टार्टअप इंडिया अभियान की सफलता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आज भारत नवाचार और उद्यमिता का वैश्विक केंद्र बन रहा है। उन्होंने कहा कि जेन-जी भारत की रचनात्मक शक्ति है, जो परंपरा और तकनीक के संगम से नए संसार रचने की क्षमता रखती है। भारतीय सांस्कृतिक कथाएँ, मिथक और गाथाएँ डिजिटल माध्यमों और गेमिंग के जरिए वैश्विक मंच पर भारत की सॉफ्ट पावर को नई ऊँचाइयाँ प्रदान कर सकती हैं।

कार्यक्रम में संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश की विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थाओं एवं अकादमियों द्वारा कला, साहित्य, नाट्य, संगीत, लोक एवं जनजातीय संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कलाकारों, विद्वानों एवं साधकों को सम्मानित किया गया। राज्य ललित कला अकादमी, लखनऊ द्वारा चित्रकला के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान हेतु नलिनी कुमार मिश्रा को बाबा योगेन्द्र कला सम्मान (राष्ट्रीय), डॉ. साधना सिंह तथा सतेन्द्र सिंह को बाबा योगेन्द्र कला सम्मान (राज्य स्तरीय) से अलंकृत किया गया। अन्तर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, लखनऊ द्वारा प्रो. (डॉ.) प्रद्युम्न दुबे को पालि साहित्य संवर्धन सम्मान तथा डॉ. वेन भदन्त राहुल बोधि एवं प्रो. सिद्धार्थ सिंह को बौद्ध संस्कृति संवर्धन सम्मान प्रदान किया गया।

उप्र जैन विद्या शोध संस्थान, लखनऊ द्वारा जैन दर्शन के क्षेत्र में योगदान के लिए डॉ. सुनील कुमार जैन ‘संचय’ को जैन संस्कृति संवर्धन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। भारतेन्दु नाट्य अकादमी, लखनऊ द्वारा रंगमंच के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान हेतु मुस्कान गोस्वामी (निर्देशन), देवाशीष मिश्र (अभिकल्पना), प्रो. (डॉ.) आनंद वर्धन शर्मा (अभिनय) तथा राकेश श्रीवास्तव (अभिनय) को भारतेंदु हरिश्चन्द्र सम्मान प्रदान किया गया।

उप्र संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ द्वारा रामचन्द्र भागवत को वायलिन वादन के लिए तथा अनूप कुमार अरोड़ा को नाट्य अभिनय के क्षेत्र में आचार्य भरतमुनि सम्मान से अलंकृत किया गया।

इसी क्रम में उप्र लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान, लखनऊ द्वारा लोक नाट्य नौटंकी के क्षेत्र में योगदान हेतु विजय बहादुर श्रीवास्तव को बाबा पागल दास सम्मान तथा जनजातीय नृत्य के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए विनोद कुमार गोंड को बिरसा मुण्डा सम्मान प्रदान किया गया।

कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की प्रत्येक कला विधा को नया सम्मान प्राप्त हुआ है। कला, संस्कृति एवं रचनात्मकता के विविध क्षेत्रों को निरन्तर प्रोत्साहन दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश सरकार कला और संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन तथा कलाकारों के उत्थान के लिए सतत रूप से प्रतिबद्ध है।

कार्यक्रम में गुजरात के कलाकारों द्वारा पारंपरिक लोक नृत्य की प्रस्तुति दी गयी। इस अवसर पर विशेष कार्याधिकारी राज्यपाल डॉ. सुधीर महादेव बोबडे, अपर मुख्य सचिव पर्यटन व संस्कृति अमृत अभिजात, कलाविद आदि उपस्थित थे।



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