जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग (उपभोक्ता फोरम) के प्रति जागरुकता का नतीजा है कि उपभोक्ताओं का भरोसा लगातार इस पर बढ़ रहा है। बीमा कंपनियों या अन्य मामलों में पीड़ित उपभोक्ता अब पहले की तुलना में ज्यादा आयोग के पास जा रहे हैं। उन्हें राहत भी मिल रही है।
आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष 450 मामलों में उपभोक्ताओं को राहत मिली। 1983 में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम बना था। इसके बाद 1988 से इस पर काम शुरू हुआ। फोरम की स्थापना से अब तक 14 हजार 823 मामले आए, इनमें से 12 हजार 735 प्रकरण का निराकरण हो चुका है। सालाना आंकड़ों की बात करें तो 2018 में जहां 158 मामले निस्तारित हुए थे वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 450 पर पहुंच गई।
त्वरित निराकरण से हो रहा लाभ
आयोग के अध्यक्ष अमर पाल सिंह व सदस्य देवेश अग्निहोत्री और ज्योति प्रभा जैन द्वारा मामलों की तेजी से सुनवाई की जा रही है। अदालत के आंकड़ों के अनुसार 2024 में 398 शिकायतें दर्ज की गईं, इनमें सारे मामले निस्तारित कर दिए गए। यही हाल चालू वर्ष का है। अब तक आयोग में 495 मामले आए, इनमें से 450 उपभोक्ताओं को राहत मिल गई।
