केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बुंदेलखंड की जलवायु और मिट्टी दलहन की फसल के लिए बहुत उपयुक्त है। चावल और गेहूं में तो भारत आत्मनिर्भर हो गया है लेकिन दालें अभी आयात करनी पड़ती हैं। इसके मद्देनजर बुंदेलखंड में दलहन मिशन शुरू किया जाएगा ताकि दालों की पैदावार और बढ़ सके। दालों के प्रसंस्करण के लिए मिल भी लगाएंगे। उन्होंने ये बात रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के बाद मीडिया से बातचीत में कही।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि उत्पादन बढ़ाने के लिए नई-नई किस्में और कृषि पद्धतियां ला रहे हैं। बुंदेलखंड में दालों का क्लस्टर बनाएंगे। किसानों को निशुल्क बीज बांटने से लेकर अन्य सहयोग भी करेंगे। बुंदेलखंड की कृषि भी तेजी से आगे बढ़े, इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम कर रही हैं। शिवराज सिंह ने कहा कि देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, पोषणयुक्त आहार देना, किसानों की खेती में मुनाफा बढ़े इसका इंतजाम करने के लिए काम जारी है। एकीकृत खेती का नया मॉडल बनाया है, जिसमें छोटी जोत के आकार में भी फसलें, फल, सब्जियां, अनाज आदि के साथ ही पशुपालन, बकरी पालन, मधुमक्खी पालन, कृषि वानिकी कर सकते हैं। इस मॉडल को छोटे किसानों तक ले जाना है।

‘विपक्ष का काम सिर्फ विलाप करना है’

भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर विपक्ष के सरकार पर देश बेचने के आरोप पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विपक्ष केवल विलाप करता रहता है। देश को बेचा तब था, जब तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने सिंधु जल समझौता करके 80 फीसदी पानी पाकिस्तान को दे दिया था। देश बिका तब था, जब 1993 में भारत तेलों के मामले में आत्मनिर्भर था फिर भी तत्कालीन कांग्रेस की सरकार ने आयात की छूट देकर राष्ट्र का नुकसान किया। जब मोदी सरकार आई, तब दृढ़ संकल्प लिया गया कि किसानों को सब्सिडी और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को निशुल्क राशन देंगे। अभी अमेरिका से समझौता प्रस्तावित है, हुआ नहीं है लेकिन जितने देशों से भी अब तक भारत ने समझौते किए हैं, उनमें राष्ट्र और किसानों का हित सबसे ऊपर है। कृषि मंत्री होने के नाते पूरी जिम्मेदारी से कह रहा हूं कि समझौते से भारत के किसानों को लाभ होगा।



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