बांधों की सुरक्षा और रखरखाव के लिए विशेष टास्क फोर्स गठित की जाएगी, जिसमें विशेषज्ञों समेत विभिन्न विभागों के सदस्य शामिल होंगे। इस टास्क फोर्स का मुख्य उद्देश्य बांधों की नियमित निगरानी कर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना होगा। खासकर पुराने बांधों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
केंद्रीय जल आयोग द्वारा बांध सुरक्षा अधिनियम लागू किए जाने के बाद यह प्रक्रिया शुरू हुई है। इसके तहत केंद्र और राज्य स्तर पर समितियां बनाई जाएंगी। राज्य स्तरीय समिति की अध्यक्षता बांध सुरक्षा विभाग के मुख्य अभियंता करेंगे, जबकि इसमें तकनीकी अधिकारी, पड़ोसी राज्यों के प्रतिनिधि, केंद्रीय जल आयोग और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के प्रतिनिधि तथा जल विज्ञान और बांध डिजाइन के विशेषज्ञ शामिल होंगे।
समिति का पुनर्गठन हर तीन वर्ष में किया जाएगा और वर्ष में कम से कम दो बैठकें अनिवार्य होंगी, जिनमें एक बैठक मानसून से पहले करना जरूरी होगा। समिति को बांधों की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण अधिकार भी दिए गए हैं। झांसी मंडल में पारीछा और सुकुवां-ढुकुवां बांध सौ वर्ष से अधिक पुराने हो चुके हैं, जबकि माताटीला और राजघाट बांध भी लगभग पांच दशक पुराने हैं। उम्र बढ़ने के साथ इनकी क्षमता पर असर पड़ रहा है, ऐसे में इनकी निगरानी और रखरखाव पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
बांध सुरक्षा अधिनियम का उद्देश्य बांधों को सुरक्षित रखना है और इसके तहत आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। – पंकज सिंह, अधिशासी अभियंता, माताटीला बांध
