महिला अस्पताल में पांच दशक में मरीजों की संख्या बढ़ती गई लेकिन स्टॉफ की बढ़ोतरी नहीं हुई। इससे मरीजों के इलाज से लेकर उनकी देखरेख मुश्किल होती जा रही है। स्थिति यह है कि जितने पद स्वीकृत हैं, उन सभी पर तैनाती भी नहीं है।

जिला अस्पताल की स्थापना 1891 में हुई थी, जिसमें पुरुषों के साथ गर्भवती महिलाओं का भी उपचार किया जाता है। वहीं, 1970-75 में महिला जिला अस्पताल की अलग से स्थापना की गई। शुरुआत में यहां 47 बेड की व्यवस्था की गई थी और सीएमएस, डॉक्टर, स्टाफ नर्स, आया, चीफ फार्मासिस्ट समेत 48 स्थायी पद सृजित किए गए थे। तब से अब तक महिला अस्पताल में मरीजों की संख्या काफी बढ़ गई है। बेड की संख्या 78 हो गई है। रोजाना ओपीडी में औसतन 250 महिलाएं आती हैं। हर माह 250 से ज्यादा सामान्य और करीब 40 सिजेरियन प्रसव होते हैं। नवजातों के लिए भी एसएनसीयू की व्यवस्था है। इसके बावजूद शासन ने अब तक स्थायी कर्मियों के न पद बढ़ाए न सभी स्वीकृत पदों पर तैनाती की। सूत्रों का कहना है कि 10 साल से शासन को रिक्त पदों पर तैनाती और जरूरत के हिसाब से पद सृजन के लिए पत्र लिखे जा रहे हैं।

नर्सों की भी कमी

महिला अस्पताल में नर्सों की संख्या भी पर्याप्त नहीं है। इस वजह से एक नर्स को दो-दो वार्ड में भर्ती रोगियों को देखना पड़ता है, जो काफी चुनौतीपूर्ण है।

संविदा व आउटसोर्स कर्मी भी पूरे नहीं

साफ-सफाई का काम आउटसोर्स कर्मियों से कराया जा रहा है। वहीं, एनएचएम से संविदा पर चार नर्स मिली हैं, जो पर्याप्त नहीं हैं।

सिर्फ एक स्त्री रोग विशेषज्ञ की तैनाती

महिला अस्पताल में सिर्फ एक स्त्री रोग विशेषज्ञ की तैनाती है। एक डॉक्टर सर्जरी का डिप्लोमा किए हुए हैं। इन दोनों पर ही गर्भवतियों की सर्जरी की जिम्मेदारी है। यदि कोई छुट्टी पर चला जाता है तो मुश्किल हो जाती है।

आया तक के पद खाली

अस्पताल में कुल 46 स्थायी पद स्वीकृत हैं, लेकिन 24 पदों पर तैनाती नहीं है। वर्तमान में चिकित्साधिकारी एल टू स्तर के पांच पद, एक-एक चीफ फार्मासिस्ट, प्रधान सहायक, वरिष्ठ सहायक, धोबी, छह सफाई कर्मी, छह वार्ड आया आदि के पद खाली हैं।

न स्थायी एनेस्थेटिक मिला न रेडियोलॉजिस्ट

महिला अस्पताल में स्थायी एनेस्थेटिक (निश्चेतक) भी तैनात नहीं है। सीएमओ ने एक डॉक्टर को छह दिन के लिए संबद्ध किया है। रेडियोलॉजिस्ट की भी तैनाती नहीं है। मजबूरन सोनोग्राफर से काम चलाया जा रहा है।

रिक्त पद पर तैनाती की मांग करते हैं। सीएमओ अस्थायी तौर पर व्यवस्था करते हैं। अस्पताल की व्यवस्थाएं सुचारु रखने के लिए रिक्त पदों पर तैनाती जरूरी है।

डॉ. राजनारायण, सीएमएस, महिला अस्पताल



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