तापमान में उतार-चढ़ाव से बच्चों की सेहत बिगड़ रही है। कोई डायरिया (उल्टी-दस्त) की चपेट में आ रहा है तो कोई बुखार, खांसी-जुकाम से ग्रस्त है। मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग की ओपीडी में डायरिया के 30 तो बुखार, खांसी-जुकाम से पीड़ित 40 फीसदी बच्चे आ रहे हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि तापमान घटने-बढ़ने से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो रही है। ऊपर से फसल कटने से परागकण शुष्क हवा से फैल रहे हैं। इससे जहां वायरल की चपेट में आकर बच्चे बुखार-खांसी-जुकाम से परेशान हैं वहीं एलर्जी से भी बुखार व वायरल निमोनिया हो रहा है। खान-पान बिगड़ने से बच्चे डायरिया की चपेट में आ रहे हैं। हालत चिंताजनक होने पर रोजाना छह-सात बच्चों को भर्ती करना पड़ रहा है।

बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ओमशंकर चौरसिया ने बताया कि ओपीडी में 30 फीसदी बच्चे डायरिया और 40 फीसदी वायरल संक्रमण व एलर्जी की वजह से बुखार, खांसी-जुकाम के आ रहे हैं।

सूरज से एलर्जी व फंगल के बढ़े रोगी

त्वचा रोग विभागाध्यक्ष डॉ. नीरज श्रीवास्तव ने बताया कि इस समय सूरज की रोशनी तेज होने से एलर्जी के रोगियों की संख्या 55 फीसदी से ज्यादा पहुंच गई है। उन्होंने बताया कि लोग एलर्जी या फंगल संक्रमण को हल्के में लेकर बाजार से स्टेरॉयड क्रीम ले रहे हैं। इससे तुरंत राहत मिल रही है मगर अंदर ही अंदर संक्रमण फैल रहा है। इससे 45 दिन तक दवा का सेवन करना पड़ रहा है।



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