यूटीएस (अनारक्षित टिकटिंग प्रणाली) से जारी टिकटों में फर्जीवाड़ा सामने आया है। यह मामला रेलवे बोर्ड तक भी जा पहुंचा। इससे आला अफसरों के बीच खलबली मच गई। रेलवे बोर्ड ने स्थानीय स्तर पर विजिलेंस को सतर्क करते हुए धरपकड़ के निर्देश दिए हैं। यूटीएस प्रणाली से जारी होने वाले टिकटों को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है।

पिछले दिनों प्रयागराज में एटीवीएम फैसिलिटेटर को फर्जी यूटीएस टिकट के साथ पकड़ा गया था। जीआरपी से पूछताछ में उसने बताया था कि यह गिरोह देश के दूसरे जगहों पर भी काम रहा है। कई अन्य जगहों पर भी इस तरह के मामले सामने आए थे। निदेशक सतर्कता (यातायात) के उमा महेश्वर राव ने एडवाइजरी जारी करते हुए यूटीएस टिकटों में फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ अभियान चलाने के निर्देश दिए। टिकट चेकिंग स्टाफ को प्रशिक्षित कर ट्रेनों एवं प्लेटफार्म पर यूटीएस टिकटों की सख्ती से जांच कराने को कहा है। फर्जी यूटीएस टिकट गिरोह व जालसाजों पर कार्रवाई के लिए विजिलेंस को भी निर्देश दिए गए हैं।

फर्जी टिकट पकड़ने के लिए हुई कार्यशाला

यूटीएस से जारी होने वाले फर्जी टिकटों को पहचाने के लिए शुक्रवार को रेलवे स्टेशन पर कार्यशाला आयोजित हुई। एसीएम अनिल कुमार श्रीवास्तव ने चेकिंग एवं बुकिंग स्टाफ को यूटीएस प्रिंटेड फॉर्मेट, वाटरमार्क जैसी बारीकियां समझाईं। सुरक्षा फीचर्स के लिए यूटीएस नंबर, स्टॉक नंबर, रैंडम नंबर और क्यूआर कोड के सत्यापन की जानकारी दी। बताया कि थर्मल स्टेशनरी पर स्टॉक नंबर के सभी अंक और सामान्य स्टेशनरी पर अंतिम चार अंक प्रिंट होते हैं। टिकट स्कैन कर उनकी प्रामाणिकता सुनिश्चित की जा सकती है।



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