घनश्याम हेमलानी ने बताया 8 मई को कुछ महिलाएं उनकी पत्नी को बहलाकर कीर्तन में बीमारी दूर करने के बहाने से ले गईं। वहां उनके हाथ से कलावा काट दिया। कहा कि घर से देवी देवताओं की प्रतिमा भी फेंक दो। तभी बेटी की शादी और मकान मिल पाएगा। उन्होंने घर आकर पति को सारी बात बताई। इस पर वह 6 जुलाई को अपने साथ शाहगंज निवासी समाजसेवी सुनील कर्मचंदानी को इलाज के लिए लेकर गए। वहां दोनों के हाथ के कलावा और टीका हटा दिया। अंदर मोबाइल ले जाने से मना कर दिया। आरोपियों ने जल्द बीमारी दूर करने का आश्वासन दिया।सभा में मोबाइल लेकर जाने की इजाजत नहीं थी। 13 जुलाई को वह कमर में मोबाइल छिपाकर ले गए। कीर्तन के बाद मौन करने के दौरान थोड़ा सा वीडियाे बना लिया। डर से मोबाइल अंदर रख लिया। उन्हें डर था कि आरोपियों ने पकड़ लिया तो जाने से मार देंगे।
बाद में सनातन धर्म को बचाने की ठानी। दिल्ली से कैमरे वाला चश्मा लेकर आ गए। कीर्तन में उससे आरोपियों की सारी गतिविधियों के वीडियो बना लिए। पुलिस को सौंप दिए। उन्होंने सुनील कर्मचंदानी के माध्यम से साक्ष्य पुलिस आयुक्त को दिखाए। तब पूरे प्रकरण का खुलासा हो गया। आगरा में शाहगंज पुलिस ने धर्मांतरण कराने वाले गिरोह के मुख्य आरोपी राजकुमार लालवानी और तीन महिलाओं सहित आठ लोगों को गिरफ्तार किया था। आरोपी प्रार्थनासभा में लोगों को बहाने से बुलाते थे। ईसाई धर्म अपनाने पर बीमारी और गरीबी दूर करने का झांसा देते थे। घर से देवी-देवताओं की मूर्तियां हटाने का दबाव डालते थे। हाथों से कलावे कटवा देते थे। तिलक लगाने से रोक देते थे। मुख्य आरोपी भी चार साल पहले हिंदू से ईसाई बना था। इसके बाद अन्य लोगों का धर्म परिवर्तन कराने लगा। उसके संपर्क में कई और लोग हैं। उनके बारे में पुलिस पड़ताल में लगी है।
