ताज महोत्सव की चकाचौंध में फिर नियमों को रौंदा जा रहा हैं। प्रतिबंधित डीजल जनरेटर जहर के रूप में काला धुंआ उगल रहे हैं। मेला परिसर में मुख्य मंच से लेकर स्टॉल तक सभी के लिए बिजली कनेक्शन के इंतजाम नहीं हुए है। महोत्सव शुरू होने में अब सिर्फ एक दिन शेष हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देश के बावजूद टीटीजेड में नियमों की अनदेखी पर जिम्मेदार मौन हैं।

ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) के अध्यक्ष और मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप सिंह के हाथों में महोत्सव की कमान है। जिस क्षेत्र में कोयला, लकड़ी और डीजल जनरेटर प्रतिबंधित हैं, वहां महोत्सव के लिए खुलेआम नियमों का मखौल उड़ रहा है। बीते वर्षों में मेला परिसर में डीजल जनरेटर चलते रहे हैं लेकिन जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे रहे। सोमवार को फिर मुख्य मंच के पीछे डीजल जनरेटर चल रहा था। हर जगह बिजली कनेक्शन न मिल पाना इसकी मुख्य वजह है, जिसका विकल्प अवैध डीजल जनरेटर बने हुए हैं।

जन प्रहरी संस्था के संयोजक नरोत्तम सिंह शर्मा का कहना है कि महोत्सव में सिर्फ पर्यावरण ही नहीं, पर्यटकों की जान भी जोखिम में होती है। लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर झूलों की फिटनेस जांच में लापरवाही बरतते हैं। वर्ष 2024 में आवास विकास कॉलोनी में झूला टूटने से एक बच्ची की मौत हो गई थी।

अपनाए जा रहे दोहरे मापदंड

पर्यावरणविद डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य का कहना है कि अफसरों के मुंह में कुछ और पेट में कुछ और है। संवेदनशील क्षेत्र में महोत्सव के नाम पर दोहरे मापदंड अपनाना गलत है। वहीं, जिलाधिकारी अरविंद मलप्पा बंगारी का दावा है कि इस बार पर्यावरण नियमों का सख्ती से पालन होगा और डीजल जनरेटर का प्रयोग वर्जित रहेगा।

 



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