मुजफ्फरनगर: Muzaffarnagar News नवरात्रि के शुभारंभ के साथ ही देवी दुर्गा की उपासना पूरे देश में उत्साह और श्रद्धा के साथ की जा रही है। हर साल की तरह इस बार भी नवरात्रि का प्रारंभ कलश स्थापना से हुआ, जिसने न केवल मंदिरों में बल्कि घरों में भी विशेष धार्मिक वातावरण बना दिया। मुजफ्फरनगर समेत पूरे देशभर में माता रानी के भक्तों की भीड़ मंदिरों में उमड़ पड़ी। नवरात्रि के इस पवित्र अवसर पर, लोग अपने घरों और मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना करने में जुट गए हैं।
मंदिरों में भक्ति की लहर
नवरात्रि के अवसर पर मुजफ्फरनगर शहर के सभी देवी मंदिरों को भव्य तरीके से सजाया गया है। रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों की माला से सजे मंदिरों की सुंदरता देखते ही बनती है। आज सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिरों में माता के दर्शन के लिए उमड़ पड़ी। हर कोई मां भगवती की कृपा प्राप्त करने के लिए पूजा-पाठ कर रहा है, और मंदिरों में चारों ओर जयकारों की गूंज सुनाई दे रही है।
मंदिरों में पवित्रता और भक्ति का वातावरण चारों ओर फैला हुआ है। सुबह-सवेरे से ही भक्तगण मां जगदंबा के चरणों में फल-फूल और प्रसाद चढ़ाकर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। नवरात्रि के इस पावन पर्व पर हर श्रद्धालु ने अपने दिल में आस्था और विश्वास के दीप जलाए हैं।
घरों में भी श्रद्धालुओं की पूजा-अर्चना
मंदिरों के साथ-साथ घरों में भी देवी दुर्गा की पूजा का विशेष महत्व है। नवरात्रि के पहले दिन घरो में कलश स्थापना की जाती है, जिससे नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व की विधिवत शुरुआत होती है। महिलाएं और परिवार के सदस्य अपने घरों में देवी की मूर्ति स्थापित कर विधिपूर्वक पूजा कर रहे हैं। साथ ही नन्ही कन्याओं के चरण पखार कर उन्हें देवी का रूप मानकर प्रसाद वितरित किया जा रहा है।
यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि समाज और परिवार के बीच आपसी प्रेम और आदर को बढ़ाने का एक माध्यम भी है। माता दुर्गा के स्वागत के साथ हर घर में सुख-समृद्धि और शांति की कामना की जा रही है। खासकर महिलाओं में इस पर्व को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है, जो देवी की उपासना में पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ जुटी हुई हैं।
शहर में भव्य सजावट और प्रशासनिक तैयारियां
मुजफ्फरनगर में नवरात्रि को लेकर पहले ही सभी मंदिरों और प्रमुख स्थलों पर विशेष सजावट की गई थी। मंदिरों के बाहर रंग-बिरंगी झालरों और आकर्षक लाइट्स की व्यवस्था की गई थी। प्रशासन ने भी विशेष तैयारियां की हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। नगर पालिका द्वारा मंदिरों के आसपास साफ-सफाई और कीटनाशक छिड़काव की व्यवस्था की गई है, जिससे श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के देवी मां के दर्शन कर सकें।
सुरक्षा व्यवस्था को भी चाक-चौबंद किया गया है। पुलिस और प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष उपाय किए गए हैं। कई जगहों पर अस्थायी पुलिस चौकियां स्थापित की गई हैं, ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो। इसके अलावा, ट्रैफिक नियंत्रण के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं, ताकि मंदिरों की ओर जाने वाले सभी मार्ग सुचारू रूप से चलते रहें।
नवरात्रि की सांस्कृतिक धरोहर
नवरात्रि का पर्व केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक महत्व भी रखता है। देवी दुर्गा की पूजा के साथ-साथ इस पर्व के दौरान अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। लोकगीत, डांडिया, गरबा और देवी के भजन गाने की परंपरा इस त्योहार की विशेषता है। देश के विभिन्न हिस्सों में नवरात्रि का यह पर्व अपनी सांस्कृतिक विविधता के साथ मनाया जाता है। पश्चिम भारत में गरबा और डांडिया नृत्य का आयोजन होता है, जबकि पूर्वी भारत में दुर्गा पूजा की भव्यता देखते ही बनती है।
विशेषकर पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम में दुर्गा पूजा का विशेष महत्व है। यहां की दुर्गा पूजा विश्व प्रसिद्ध है, जहां लोग मां दुर्गा की प्रतिमाओं को भव्य तरीके से सजाकर पूजा करते हैं। पंडालों की सजावट और सांस्कृतिक कार्यक्रम पूरे देश में चर्चा का विषय बनते हैं।
सात्विक खानपान और उपवास की परंपरा
नवरात्रि के दौरान उपवास रखने की परंपरा भी है। भक्तजन इस समय सात्विक भोजन का सेवन करते हैं, जिसमें फल, दूध और विशेष व्रत सामग्री का उपयोग होता है। माना जाता है कि नवरात्रि के उपवास से शरीर को शुद्धि मिलती है और आत्मा को शांति प्राप्त होती है। इसलिए इस अवधि में लोग तामसिक भोजन से दूर रहते हैं और पूरी तरह से मां दुर्गा की आराधना में लीन रहते हैं।
विशेष रूप से महिलाएं और बुजुर्ग इन नौ दिनों तक उपवास रखते हैं और हर दिन मां के विभिन्न रूपों की पूजा करते हैं। नवरात्रि के उपवास न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि यह हमारे शरीर को भी प्राकृतिक तरीके से शुद्ध करते हैं।
नवरात्रि के अंतिम दिन: कन्या पूजन और विसर्जन
नवरात्रि के अंतिम दिन, जिसे नवमी के रूप में जाना जाता है, देवी के नौ रूपों की पूजा के साथ कन्या पूजन का आयोजन किया जाता है। छोटे-छोटे बच्चियों को देवी के रूप में पूजा जाता है और उन्हें भोजन कराया जाता है। इस दिन का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह शक्ति और स्त्रीत्व के सम्मान का प्रतीक है।
इसके बाद दसवें दिन देवी दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है। इस दिन भक्तजन देवी को विदा करते हैं और अगले वर्ष फिर से आने की प्रार्थना करते हैं। विसर्जन के समय भक्तजन मां दुर्गा की प्रतिमा को नदी या तालाब में विसर्जित करते हैं, जो इस पर्व का अंतिम और अत्यंत महत्वपूर्ण चरण होता है।
आध्यात्मिकता और समाज के प्रति सकारात्मक प्रभाव
नवरात्रि केवल एक धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका समाज और व्यक्तिगत जीवन पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है। यह पर्व हमें धर्म, नैतिकता, अनुशासन और समाज के प्रति जिम्मेदारी की याद दिलाता है। मां दुर्गा की उपासना के माध्यम से हम अपने भीतर की बुराइयों को खत्म करने और जीवन में सकारात्मकता लाने का प्रयास करते हैं।
इस पर्व के दौरान हर व्यक्ति अपने कर्मों की समीक्षा करता है और मां भगवती से आशीर्वाद प्राप्त करता है ताकि वह अपने जीवन में सुख-समृद्धि और शांति प्राप्त कर सके। समाज में भी यह पर्व आपसी प्रेम, सहयोग और एकता का संदेश देता है।