प्रदेश सरकार ने सोमवार को नगर निगम के लिए नामित पार्षदों की सूची जारी कर दी। इसमें वैसे तो विधायकों-सांसदों की सिफारिशों को तवज्जो मिली है। हालांकि सूची जारी होने के बाद घमासान भी मच गया है। मौजूदा भाजपा पार्षद ने उनके खिलाफ चुनाव लड़ने वाले को उसी सदन का सदस्य बनाने का विरोध शुरू कर दिया है। मांग की है कि सरकार तत्काल इस मनोनयन को रद्द कर पार्टी के किसी अनुशासित कार्यकर्ता को पार्षद मनोनीत करे।
दरअसल, नगर निगम के चुनाव के दौरान गोपेश्वर मंडल निवासी संजय राय ने वार्ड 95 के मौजूदा पार्षद शरद चौहान के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ा था। चुनाव में शरद जीत गए, लेकिन उनका चुनाव बागी पूर्व पार्षद संजय की वजह से फंस गया था। यही वजह है कि मनोनयन की सूची जारी होते ही पार्षद ने लिखित रूप से आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा है कि भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले व्यक्ति को नामित पार्षद बनाया जाना पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनता की भावना के खिलाफ है।
उन्होंने इसे संगठनात्मक अनुशासन के विपरीत बताते हुए कहा कि इससे पार्टी की छवि पर भी असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि भाजपा में ऐसे कई समर्पित कार्यकर्ता हैं, जिन्होंने वर्षों तक पार्टी के लिए कार्य किया है। फिर भी विरोधी को जिम्मेदारी देना उचित नहीं है। पार्षद ने इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग करते हुए पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों से हस्तक्षेप की अपील की है।
बड़े नेताओं की जमकर चली
जिन नेताओं का पार्षद के रूप में मनोनयन हुआ है उनमें संजय राय के अलावा अमित अग्रवाल पारुल, सुषमा जैन, जितेंद्र सविता, सुनील कर्मचंदानी, पंकज सिकरवार, धर्मवीर सिंह सिकरवार, नितीश भारद्वाज, हरिओम बघेल और राहुल वाल्मीकि शामिल हैं। संजय विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल के करीबी जबकि अमित अग्रवाल व सुषमा जैन को नवीन जैन का करीबी माना जाता है। सुनील कर्मचंदानी लंबे समय से पार्टी के साथ-साथ कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय का मीडिया सेल देखते रहे हैं। वहीं, पंकज सिकरवार महामंत्री राम प्रताप सिंह चौहान व हरिओम बघेल को केंद्रीय मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल के कोटे से जगह मिलने की बात कही जा रही है। कई बड़े ब्राह्मण दावेदारों को पछाड़ कर पार्षद बने नितीश भारद्वाज के नाम ने सभी को चौंकाया। वहीं, राहुल वाल्मीकि व जितेंद्र सविता लंबे समय से पार्टी के पदों पर तैनात हैं।
