
मंदिर में खड़ा पति रामसेवक
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
फतेहपुर जिले में देवमयी विकास खंड के पधारा निवासी रामसेवक रैदास ने अपनी पत्नी की यादों में एक मंदिर की स्थापना कर दी। पत्नी भक्त रामसेवक पहले सीजनल अमीन था और फिर सन 2015 में स्थाई अमीन हो गए। मई 2020 में पत्नी की मृत्यु के कुछ दिन बाद ही रामसेवक को पत्नी की कमी बहुत परेशान करने लगी।
तब उसके दिमाग मे आया कि पत्नी का मंदिर बनवाया जाए। गांव में ही 18 बिस्वा जमीन है, उसी में तीन बिस्वा में एक किनारे मंदिर बनवा दिया। इसके बाद राजस्थान के मकराना से फोटो लेकर संगमरमर की मूर्ति बनवाकर ले आया। पूरे विधि विधान से शोभा यात्रा निकाल कर मूर्ति की स्थापना कर दी।
यह सब गांव देखकर ताने मारते, लेकिन रामसेवक पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। उसने किसी की बात पर ध्यान नहीं दिया। रामसेवक ने बताया कि मेरी पत्नी पतिव्रता, अतिथियों का आदर और सही तरीके से बच्चों की परवरिश को देखते हुए मेरे दिल और दिमाग मे बस गई और अटूट प्रेम हो गया।