
पिता कृष्णकांत अवस्थी व पुत्र कल्पेश अवस्थी
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अलीगढ़ के अतरौली में चल रही रामलीला में इस बार भी कृष्णकांत अवस्थी रावण और उनका बेटा कल्पेश अवस्थी राम की भूमिका में हैं। राम बने कल्पेश ने रामलीला के मंचन के दौरान बीते चार साल में 32 बार रावण की भूमिका निभाने वाले अपने पिता को मारा है।
कल्पेश ने बताया कि रामलीला में युद्ध के दौरान उन्हें पिता नहीं सिर्फ रावण नजर आता है, वह अपने किरदार में डूब जाते हैं। इसके बाद लीला के अनुसार उनका वध करते हैं। अतरौली के मंचन में पुत्र ने पिता को मंगलवार को 32वीं बार मारा है।

मथुरा की आदर्श बालाजी रामलीला मंडली के प्रबंधक कृष्णकांत अवस्थी कहते हैं कि रामलीला में उनका बेटा कल्पेश राम की भूमिका निभाता है। मंचन के दौरान वह यह नहीं देखता कि सामने उसका पिता है, बल्कि अपने किरदार में डूब कर रावण को तीर मारते हैं। जिससे कई बार वह वास्तविक रूप में जख्मी हो जाते हैं। पिता पुत्र को रावण व राम की भूमिका में दर्शक खूब पसंद करते हैं।

कृष्णकांत बताते हैं कि मंडली की स्थापना उनके पिता मुकेश कुमार अवस्थी ने 40 साल पहले की थी, जिसमें वह रावण बनते थे। देश की प्राचीन संस्कृति जीवित रहे, इसीलिए वह मंडली को चला रहे हैं। पिता पुत्र के अलावा इस परिवार के अन्य सदस्यों में कृष्णकांत की बेटी बाबू अवस्थी, बेटा तन्नू अवस्थी सीता व शत्रुघ्न का पाठ अदा करते हैं। चचेरा भाई महेंद्र शर्मा भी रामलीला में अभिनय करता है। यूपी के अलावा गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान व हिमाचल में भी रामलीला मंचन करने का मौका मिलता है।
