लखनऊ के ठाकुरगंज स्थित एरा मेडिकल कॉलेज के 13 डॉक्टरों और दो मालिकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने सर्जिकल औजार महिला के पेट में ही छोड़ दिया और शिकायत के बावजूद इस गंभीर भूल को नजरअंदाज किया। पीड़िता ने बाद में दूसरे अस्पताल से औजार निकलवाया।

आईआईएम क्रॉसिंग स्थित एल्डिको सिटी ब्रिज अपार्टमेंट निवासी रूपा शर्मा के अनुसार जनवरी 2023 में पेट दर्द की शिकायत पर वह एरा मेडिकल कॉलेज पहुंचीं। डॉक्टरों ने 27 फरवरी 2023 को ऑपरेशन किया। आरोप है कि टांके पक जाने से 17 मार्च 2023 को दोबारा ऑपरेशन किया और 23 मार्च को डिस्चार्ज कर दिया गया। घर आने पर भी पेट दर्द दूर नहीं हुआ। उन्होंने फिर से एरा में डॉक्टरों को दिखाया तो दर्द निवारक दवा दे दी गई।

ये भी पढ़ें – प्रदेश में भीषण शीतलहर, इन 45 जिलों में दिन के पारे में होगी भारी गिरावट; कक्षा 8 तक के स्कूल हुए बंद



ये भी पढ़ें –  चुनाव आयोग ने जारी की एसआईआर के बाद कच्ची लिस्ट, हट गए 2.89 करोड़ वोटरों के नाम; इन जिलों में कटे सबसे ज्यादा वोटर

आरोप है कि दो अगस्त को अस्पताल में अल्ट्रासाउंड में पेट में सर्जिकल औजार होने का पता चला, लेकिन डॉक्टरों ने इस बात को दबाकर झूठी रिपोर्ट बना दी। आठ अगस्त को रूपा ने दूसरे अस्पताल में दिखाया। सीटी स्कैन में पेट में सर्जिकल औजार होने की पुष्टि हुई। 20 अगस्त को ऑपरेशन कर इसे निकाला गया। पीड़िता का आरोप है कि एरा मेडिकल कॉलेज ने इलाज के नाम पर उनसे पांच लाख रुपये भी ऐंठ लिए।

डीसीपी पश्चिम विश्वजीत श्रीवास्तव का कहना है कि कोर्ट के आदेश पर ठाकुरगंज थाने में सोमवार को एरा की डॉ. सुमन, डॉ. नूपुर सर्जन, असिस्टेंट जेआर डॉ. श्रित्या कश्वि, डॉ. आयुष वर्मा, कंसल्टेंट डॉ. अहमद अंसारी, डॉ. ओसामान मूसा हिंगोरा, डॉ. वकार, डॉ. सिद्दीकी, डॉ. पृथ्वी, डॉ. देसना, डॉ. जमाल मसूद, डॉ. सुरजीत बासु, डॉ. फरजाना के अलावा मालिक मोहसिन अली खान और मीसम अली खान के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। जल्द पीड़िता का बयान दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी।

जिम्मेदारों ने नहीं सुनी तो ली कोर्ट की शरण

रूपा वर्मा ने एफआईआर में आरोप लगाया है कि मामले में उन्होंने 27 अगस्त को पुलिस आयुक्त और 28 अगस्त को थानाध्यक्ष, सीएमओ और जिलाधिकारी को शिकायत भेजी थी। इस पर अधिकारियों ने कोई सुनवाई नहीं की। आखिर में मजबूर होकर उन्हें कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। अदालत ने एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दिया।

एरा लखनऊ मेडिकल कॉलेज के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ब्रिगेडियर डॉ. सुरजीत बासु (सेवानिवृत्त) का कहना है कि आरोप निराधार है। जांच में सच सामने आ जाएगा। एरा मेडिकल कॉलेज उपचार और चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता नहीं करता है। कोरोना कालखंड में देशभर ने एरा की कार्यशैली की सराहना की थी।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *