मुजफ्फरनगर में बढ़ते प्रदूषण को लेकर प्रशासन, उद्योग और किसान संगठनों के बीच टकराव की स्थिति अब खुलकर सामने आ गई है। Muzaffarnagar के कचहरी परिसर स्थित जिला पंचायत सभागार में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में प्रदूषण की भयावह स्थिति पर गहन विचार-विमर्श किया गया। यह बैठक ऐसे समय बुलाई गई जब बीते कई दिनों से किसान संगठनों द्वारा धरना-प्रदर्शन जारी है और ग्रामीण इलाकों से लगातार बीमारियों की आशंका को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं।
प्रशासनिक अधिकारियों, पेपर मिल मालिकों और किसान संगठनों की मौजूदगी में हुई इस बैठक में माहौल गंभीर, तीखा और कई बार तल्ख भी नजर आया। हर पक्ष ने अपनी बात मजबूती से रखी, लेकिन केंद्र में एक ही मुद्दा रहा— Muzaffarnagar pollution news और उससे प्रभावित होता आम जनजीवन।
किसानों का आक्रोश: RDF के नाम पर “कूड़ा जलाने” का आरोप
बैठक में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता Rakesh Tikait और अन्य किसान संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों ने उद्योगों पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि फैक्ट्रियों में RDF (Refuse Derived Fuel) के नाम पर खुलेआम कूड़ा-कचरा जलाया जा रहा है।
किसान नेताओं का कहना था कि इस प्रक्रिया से निकलने वाला जहरीला धुआं हवा, पानी और जमीन—तीनों को एक साथ नुकसान पहुंचा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में सांस की बीमारियां, त्वचा रोग और जल स्रोतों के दूषित होने की शिकायतें तेजी से बढ़ रही हैं।
राकेश टिकैत ने दो टूक शब्दों में कहा कि किसान दिन-रात मेहनत करके देश को अन्न देता है, लेकिन आज वही किसान प्रदूषण की सबसे बड़ी मार झेलने को मजबूर है। खेतों की मिट्टी खराब हो रही है, नलकूपों का पानी पीने लायक नहीं रहा और हवा में सांस लेना मुश्किल होता जा रहा है।
Muzaffarnagar pollution news: स्वास्थ्य संकट की चेतावनी
बैठक में यह मुद्दा भी प्रमुखता से उठा कि फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं अब केवल पर्यावरणीय समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह एक जनस्वास्थ्य संकट का रूप ले चुका है। ग्रामीणों द्वारा अधिकारियों को अवगत कराया गया कि बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं में खांसी, आंखों में जलन, सांस फूलने और एलर्जी जैसी समस्याएं आम होती जा रही हैं।
किसान संगठनों ने चेताया कि यदि समय रहते प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में इसका प्रभाव पीढ़ियों तक देखने को मिलेगा। यही कारण है कि Muzaffarnagar pollution news अब केवल स्थानीय मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक चिंता का विषय बन चुका है।
उद्यमियों का पक्ष: “नियमों के तहत लगाए गए हैं नियंत्रण संयंत्र”
बैठक में मौजूद उद्यमी वर्ग की ओर से पंकज अग्रवाल ने फैक्ट्रियों का पक्ष रखते हुए कहा कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए मिलों में आवश्यक संयंत्र लगाए गए हैं और प्रशासनिक दिशा-निर्देशों का पालन किया जाता है।
उनका कहना था कि मिल प्रशासन की यह पूरी कोशिश रहती है कि किसी भी प्रकार से जनस्वास्थ्य को नुकसान न पहुंचे। उद्योगों द्वारा समय-समय पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों के अनुसार कार्य किया जाता है।
हालांकि किसान नेताओं ने इस दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि नियंत्रण संयंत्र प्रभावी हैं, तो फिर ग्रामीण इलाकों में प्रदूषण क्यों बढ़ रहा है? इसी बिंदु पर बैठक का माहौल सबसे अधिक गरमाया।
RDF पर सख्ती की मांग: नियम उल्लंघन तत्काल रोकने की अपील
बैठक में बार-बार इस बात पर जोर दिया गया कि RDF के उपयोग के नाम पर यदि नियमों का उल्लंघन हो रहा है, तो उस पर तत्काल रोक लगनी चाहिए। किसान संगठनों ने मांग की कि RDF जलाने की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई हो।
अधिकारियों ने भी इस बात को स्वीकार किया कि यदि किसी भी फैक्ट्री द्वारा पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है, तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। Muzaffarnagar pollution news को लेकर प्रशासन अब दबाव में दिखाई दिया।
प्रशासन की भूमिका: संतुलन बनाने की कोशिश
बैठक में एडीएम प्रशासन Sanjay Singh, सिटी मजिस्ट्रेट Pankaj Prakash Rathore, स्थानीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
अधिकारियों ने दोनों पक्षों की बातें सुनीं और आश्वासन दिया कि प्रदूषण की समस्या को गंभीरता से लिया जा रहा है। प्रशासन की ओर से कहा गया कि उद्योगों की जांच, प्रदूषण स्तर की निगरानी और नियमों के अनुपालन को और सख्त किया जाएगा।
Muzaffarnagar pollution news: आंदोलन की आहट और आगे की रणनीति
किसान संगठनों ने संकेत दिए कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है। धरना-प्रदर्शन, ज्ञापन और बड़े स्तर पर जनआंदोलन की संभावना से इनकार नहीं किया गया।
यह बैठक भले ही विचार-विमर्श तक सीमित रही हो, लेकिन इसने यह स्पष्ट कर दिया कि मुजफ्फरनगर में प्रदूषण अब अनदेखा करने लायक मुद्दा नहीं रहा। प्रशासन, उद्योग और किसान—तीनों के लिए यह एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।
मुजफ्फरनगर में प्रदूषण को लेकर हुई यह बैठक आने वाले दिनों की दिशा तय करने वाली मानी जा रही है। एक ओर किसानों का बढ़ता आक्रोश है, तो दूसरी ओर उद्योगों की जिम्मेदारी और प्रशासन की सख्ती की परीक्षा। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि Muzaffarnagar pollution news केवल बैठकों तक सीमित रहती है या वास्तव में हवा, पानी और जमीन को राहत दिलाने वाले ठोस कदम जमीन पर उतरते हैं।
