
प्रतीकात्मक तस्वीर
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राजधानी लखनऊ में गृहकर की दरें दोगुना तक बढ़ सकती हैं। इसका असर छह लाख भवन स्वामियों पर पड़ेगा। गृहकर बढ़ने के साथ ही जलकर भी बढ़ जाएगा। बढ़े जलकर का असर चार लाख भवन स्वामियों पर होगा। राजधानी में 13 साल से गृहकर की दरें नहीं परिवर्तित हुई हैं।
मुख्य सचिव दुर्गाशंकर मिश्र ने नगर निगम की ”आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपइया” वाली स्थिति को देखते हुए उसे अपनी आय बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने गृहकर की दरें भी बढ़ाने को कहा है, ताकि निगम आर्थिक तौर पर आत्मनिर्भर बन सके। उल्लेखनीय है कि निगम की आय में गृहकर का हिस्सा 70 से 80 प्रतिशत तक होता है। नगर निगम अधिनियम में हर दो साल पर इसकी दरें पुनरीक्षित करने का प्रावधान है। अभी 2010 की दरों पर गृहकर वसूला जा रहा है।
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टैक्स की दरें पांच साल पहले ही तय, सियासी नफा नुकसान के चक्कर में लागू नहीं हो पाईं
टैक्स की नई दरों पर आपत्ति सुझाव की प्रक्रिया करीब पांच साल पहले पूरी की जा चुकी है। पर, राजनीतिक दबाव और चुनावी नफा-नुकसान के चक्कर में नगर निगम सदन ने उसे लागू नहीं होने दिया। ऐसे में आय से अधिक खर्च के कारण निगम करीब 300 करोड़ रुपये के कर्ज में है।
गृहकर बढ़ते ही बढ़ जाएगा जलकर
जलकल विभाग जलकर की गणना गृहकर के आधार पर करता है। हाउस टैक्स के लिए जो एनुअल रेंटल वैल्यू ( एआरवी) निकाली जाती है, उसी पर विभाग 12.5 प्रतिशत की दर से वाटर टैक्स लेता है। ऐसे में जब गृहकर बढ़ेगा तो वाटर टैक्स भी खुद-ब-खुद बढ़ जाएगा। अभी शहर में चार लाख वॉटर कनेक्शन हैं।
ऐसे होती है गृहकर की गणना
नगर निगम में हाउस टैक्स निर्धारण के लिए इलाके के हिसाब से दरें तय हैं। यह दरें प्रति वर्ग फीट के हिसाब से होती हैं। मकान के क्षेत्रफल को संबंधित इलाके की दर को 12 महीने से गुणा कर देते हैं। इस तरह जो परिणाम आता है वह उस मकान का वार्षिक किराया मूल्यांकन (एआरवी) हो जाता है। जो वार्षिक किराया मूल्यांकन संपत्ति का बनता है, उसका 15 प्रतिशत हाउस टैक्स होता है। टैक्स की गणना में बालकनी, किचन, बाथरूम, कॉरिडोर, स्टोर, पोर्टिको के क्षेत्रफल में तय छूट भी दी जाती है। मकान पुराना होता है तो उसमें भी एआरवी में तय छूट दी जाती है।
इलाके के हिसाब से तय होती हैं गृहकर की दरें
गृहकर की दरें इलाके के हिसाब से तय की जाती हैं। यदि किसी का मकान विकसित इलाके हजरतगंज में है, तो वहां गृहकर की दर अधिक होगी। किसी का घर तेलीबाग, फैजुल्लागंज या शहीद भगत सिंह वार्ड की कॉलोनी में भले ही उतनी ही चौड़ी रोड पर हो, उसकी गृहकर दर कम होगी।
