दोनों बच्चों की तलाश में जुटी टीमें
पीएसी की फ्लड यूनिट, एसडीआरएफ टीम और स्थानीय गोताखोरों ने दोनों बच्चों की तलाश में सोमवार सुबह फिर अभियान शुरू किया। घटना की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने मौके का निरीक्षण कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। प्रशासन द्वारा मृतक बच्चे के परिजनों को मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि गंगा नदी में स्नान के दौरान विशेष सावधानी बरतें और बच्चों को अकेले नदी के गहरे पानी में न जाने दें, ताकि इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।
गर्मी से बचने के लिए नदी में नहाने पहुंचे थे पांचों बच्चे
बताया गया है कि गर्मी के कारण पांचों बच्चों ने गंगा में नहाने गए थे। बहाव तेज होने के कारण पांचों डूबने लगे थे। आसपास खेतों में काम कर रहे लोगों ने बच्चों को डूबते देखा तो बचाने के लिए दौड़े। गांव के कुछ तैराक युवक गंगा में उतरे और अखिलेश को बाहर निकाल लाए, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। विकास और सिंकू को भी गोताखोरों ने डूबने से बचा लिया, लेकिन केशव और पिंटू का पता नहीं चल सका। दोनों की तलाश में गोताखोर देर रात तक डटे रहे।
परिवारों पर दुखों का पहाड़
इस हादसे ने दो परिवारों को झकझोर कर रख दिया है। जमादार के परिवार में तीन बेटे और तीन बेटियां हैं, जिनमें से दो बेटे गंगा नदी में डूब गए हैं, जिनका अब तक कोई पता नहीं चला है। वहीं संतोष के परिवार में तीन बेटे और दो बेटियां हैं। मासूम अखिलेश की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पीड़ित परिवार की महिलाओं के विलाप से माहौल गमगीन बना हुआ है।




