श्रावण मास की शुरुआत के साथ ही समूचा उत्तर भारत भक्ति के रंग में रंग चुका है। Muzaffarnagar के बझेड़ी हाईवे पर लगाए गए भव्य कांवड़ सेवा शिविर का शुभारंभ सहारनपुर मंडलायुक्त अटल कुमार राय ने फीता काटकर किया। मौके पर मौजूद श्रद्धालुओं के बीच उन्होंने कहा कि “कांवड़ यात्रा सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि यह आस्था, आत्मीयता और सेवा का संगम है।”

आत्मिक सुख देती है कांवड़ सेवा – मंडलायुक्त अटल कुमार राय

इस सेवा शिविर के उद्घाटन समारोह में डीएम उमेश मिश्रा, एसएसपी संजय वर्मा, समाजसेवी भीमसैन कंसल, सिटी मजिस्ट्रेट पंकज प्रकाश राठौर, सीओ रूपाली राव, नई मंडी कोतवाल दिनेश चन्द्र, एसएसआई संजय कुमार सहित तमाम प्रशासनिक अधिकारी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

“धार्मिक आयोजनों से आत्मा को शांति और समाज को दिशा मिलती है।” – इन शब्दों के साथ मंडलायुक्त ने कांवड़ सेवा शिविर की व्यवस्थाओं की सराहना की और पुलिस प्रशासन की तत्परता की प्रशंसा करते हुए कहा कि “नई मंडी कोतवाली द्वारा यह सेवा कार्य बहुत सराहनीय है।”


हरिद्वार से शुरू हुई आस्था की डगर, मुजफ्फरनगर बना कांवड़ियों का पड़ाव

बम-बम भोले के नारों से गूंज रहा शहर

श्रावण मास के शुभ अवसर पर जब देश भर से शिवभक्त हरिद्वार पहुंचते हैं, तब गंगाजल लेकर पैदल अपने गंतव्यों की ओर कूच करते हैं। मुजफ्फरनगर के शिव चौक पर इन दिनों दृश्य अद्भुत और अलौकिक बन गया है। सैकड़ों-हजारों कांवड़िये यहां भगवान आशुतोष की प्रतिमा की परिक्रमा कर रहे हैं और फिर गंतव्य की ओर बढ़ते जा रहे हैं।

कांवड़ियों की सेवा में तत्पर प्रशासन और स्थानीय समाजसेवी

हर तरफ सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त, स्वास्थ्य सेवाओं के शिविर, भोजन-जल की उत्तम व्यवस्था – ये सभी दृश्य बता रहे हैं कि प्रशासन और समाज दोनों ने मिलकर ‘अतिथि देवो भवः’ को चरितार्थ किया है।

रंग-बिरंगी कांवड़ें बनीं आकर्षण का केंद्र

शाम के समय, जब पूरा शहर रोशनी से नहाया होता है, तो सुंदर-सज्जित कांवड़ यात्रियों की भीड़ देखते ही बनती है। तरह-तरह की डिजिटल कांवड़, एलईडी कांवड़, म्यूजिक वाली कांवड़ युवाओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन रही हैं।


कांवड़ियों के अनुभव – श्रद्धा और रोमांच से लबालब

रोहित, जो दिल्ली के शाहदरा से हैं, बताते हैं कि वह हरिद्वार से गंगाजल लेकर निकले हैं और यह उनका लगातार पांचवां वर्ष है जब वह पैदल चलकर भोलेनाथ का जलाभिषेक करने जा रहे हैं। “यह यात्रा थकान नहीं, आत्मिक ऊर्जा देती है।”

वहीं मेरठ की खुशी, जो पहली बार अकेले कांवड़ लेने हरिद्वार गई थीं, कहती हैं, “ये अनुभव मेरे जीवन का सबसे विशेष अनुभव है। मुजफ्फरनगर में प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाएं वास्तव में प्रशंसनीय हैं। हर मोड़ पर पुलिस, महिला सुरक्षा अधिकारी, जल सेवा – सब कुछ बेहतरीन है।”


कांवड़ मार्ग पर दिखा साम्प्रदायिक सौहार्द और प्रशासनिक मुस्तैदी

मुजफ्फरनगर जैसे संवेदनशील ज़िले में कांवड़ यात्रा के दौरान जिस प्रकार प्रशासन ने 24×7 पुलिस पेट्रोलिंग, सीसीटीवी निगरानी, ड्रोन सर्विलांस और स्थानीय स्वयंसेवकों के सहयोग से माहौल को शांतिपूर्ण और भक्तिमय बनाए रखा है, वह वास्तव में सराहनीय है।

सीओ रूपाली राव ने बताया कि हर महिला कांवड़िये की सुरक्षा के लिए महिला अधिकारियों की टीम तैनात की गई है। वहीं एसएसपी संजय वर्मा ने कहा कि “कांवड़ यात्रा के दौरान जिले में चप्पे-चप्पे पर निगरानी रखी जा रही है और कोई भी शरारती तत्व बख्शा नहीं जाएगा।”


धर्म, श्रद्धा और संस्कृति का संगम बना मुजफ्फरनगर

यह कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, यह उत्तर भारत की आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक है। मंदिरों में घंटियों की गूंज, भक्तों के जयघोष, सेवा शिविरों में लगी कतारें, प्रशासन की सजगता – यह सब मिलकर साबित करता है कि जब धर्म और प्रशासन साथ चलें, तो हर आयोजन सफल होता है।


मुजफ्फरनगर इस समय पूर्ण रूप से भक्तिमय हो चुका है, और कांवड़ यात्रा ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि जब श्रद्धा और सेवा साथ हों, तो हर मार्ग आसान हो जाता है। मंडलायुक्त अटल कुमार राय द्वारा उद्घाटित कांवड़ सेवा शिविर सिर्फ सेवा का केंद्र नहीं, आस्था और समर्पण का प्रतीक बन गया है। बम-बम भोले की गूंज के साथ यह यात्रा आने वाले दिनों में और भी पवित्र और गौरवशाली रूप लेगी।

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