राज्यसभा सदस्य व सपा के राष्ट्रीय महासचिव रामजीलाल सुमन के अधिवक्ता ने न्यायालय में जवाब दाखिल किया है कि संसद में दिया गया बयान मानहानि की श्रेणी में नहीं आता है। उन्होंने यह जवाब महाराणा सांगा को लेकर दिए गए बयान के खिलाफ अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की ओर से दायर याचिका की सुनवाई कर रही अदालत में दाखिल किया है।

एमपी-एमएलए न्यायालय में जवाब आने के बाद याची पक्ष ने उसकी प्रति मांगी है। न्यायालय ने मामले में सुनवाई के लिए 24 अप्रैल तारीख नियत कर दी है। क्षत्रिय महासभा के संरक्षक अधिवक्ता सतीश सिंह के अनुसार इस मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट ने राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन को न्यायालय में हाजिर होने के लिए समन जारी करते हुए 10 अप्रैल की तारीख नियत की थी।

इस मामले में सांसद सुमन के अधिवक्ता न्यायालय में हाजिर हुए और उनकी ओर से जवाब दाखिल किया गया, जिसमें उन्होंने संविधान की धारा 105 का उल्लेख करते हुए कहा है कि संसद में दिया गया बयान मानहानि की श्रेणी में नहीं आता। अब उनके इस जवाब की प्रति लेकर अध्ययन के बाद उस पर पुन: जवाब दाखिल किया जाएगा। फिलहाल सुनवाई के लिए 24 अप्रैल नियत की गई है।



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