यदि आप बाजार से खाद्य पदार्थ खरीदकर उनका सेवन कर रहे हैं तो सावधान हो जाएं। कुछ कारोबारी अधिक मुनाफे के लालच में ऐसे तत्वों की मिलावट कर रहे हैं, जो लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। यह दावा लखीमपुर खीरी के खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट में सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, कचरी, बेसन और चायपत्ती में नॉन-परमिटेड रंग की मिलावट पाई गई है। दूध, पनीर और मावा में सोडा तथा पान मसाला में गैम्बियर मिलाए जाने की पुष्टि हुई है। चिकित्सकों के अनुसार, ऐसे तत्वों के सेवन से किडनी और लिवर को नुकसान पहुंच सकता है तथा कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।

Trending Videos

खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन समय-समय पर शिकायतों या त्योहारों के अवसर पर विशेष अभियान चलाकर सैंपलिंग करता है। दोषी पाए जाने पर कार्रवाई भी की जाती है। इसके बावजूद मिलावट पर पूरी तरह लगाम नहीं लग पा रही है। सहायक आयुक्त खाद्य बृजेंद्र शर्मा ने बताया कि कुछ कारोबारी खाद्य पदार्थों को आकर्षक व चमकदार दिखाने के लिए अखाद्य रंग मिलाते हैं, जो गैरकानूनी है।

यह भी पढ़ें- यूपी में मिलावट का खेल: भुने चने में औरामाइन की मिलावट, चायपत्ती में भी जिंदगी छीनने वाले रंग, घी भी अधोमानक

पिछले 10 महीनों में दूध, खोया और पनीर के एक-एक नमूनों में सोडा मिलने की पुष्टि हुई है। अधिकारियों का कहना है कि कई बार दूध के बर्तनों को साबुन या डिटर्जेंट से धोने के बाद ठीक से न साफ करने पर अवशेष रह जाते हैं, जिससे जांच में सोडा की पुष्टि हो सकती है।

70 प्रतिशत नमूने मानक पर खरे नहीं 

मार्च 2025 से जनवरी 2026 तक 10 महीनों में विभाग को 341 जांच रिपोर्ट प्राप्त हुईं। इनमें 264 नमूने अधोमानक (मानक से कम गुणवत्ता वाले) और 22 नमूने असुरक्षित पाए गए। अधोमानक मामलों में एडीएम कोर्ट तथा असुरक्षित मामलों में सीजीएम कोर्ट में मुकदमे दायर किए गए हैं। इस अवधि में 88 मामलों का निस्तारण हुआ, जिसमें कारोबारियों पर 18.25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया, जो अधिकांश ने जमा कर दिया है।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *