मुरादाबाद के विकास के नाम पर 11.59 अरब रुपये का बजट पास करने में नगर निगम प्रशासन ने नियम-कायदे ताक पर रख दिए। 23 फरवरी को प्रस्तावित बोर्ड बैठक से ठीक पहले कार्यकारिणी की बैठक चुपचाप निपटा दी गई। हैरानी की बात यह रही कि बैठक के लिए न तो कोई औपचारिक एजेंडा जारी किया गया और न ही सदस्यों को लिखित सूचना दी गई।
सूत्रों के मुताबिक अधिकतर सदस्यों को एक दिन पहले सिर्फ फोन पर जानकारी देकर बुलाया गया। कार्यकारिणी की इस बैठक में वर्ष 2026-27 के लिए 115925.42 करोड़ रुपये के आय-व्यय के मूल बजट को रखा गया। जबकि इतने बड़े बजट पर विस्तृत चर्चा और पारदर्शिता की अपेक्षा की जाती है।
विपक्षी पार्षदों का कहना है कि बिना एजेंडा बैठक बुलाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का उल्लंघन है और इससे कई सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने 23 फरवरी को होने वाली बोर्ड बैठक में इस बात का विरोध करने की बात कही है। पिछले वर्ष नगर निगम का बजट 11 अरब 23 करोड़ रुपये था।
इस बार बजट में बढ़ोतरी की गई है और जलापूर्ति, नाला निर्माण, सीवर लाइन मरम्मत, सड़क चौड़ीकरण, पथ प्रकाश और पार्कों के विकास जैसे कार्यों के लिए धनराशि निर्धारित की गई है। हालांकि बैठक की प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों ने पूरे मामले को विवादों में ला दिया है।
बैठक से पहले महापौर विनोद अग्रवाल ने अधिकारियों के साथ प्रस्तावित बजट पर चर्चा की और आय बढ़ाने के स्रोतों पर मंथन किया। नगर निगम की दुकानों के किराये में संशोधन का प्रस्ताव भी पारित किया गया, जिसमें किराया 434 रुपये से घटाकर 400 रुपये करने की बात कही गई।
जिस तरीके से बैठक आयोजित हुई, उससे 23 फरवरी की बोर्ड बैठक में हंगामे के आसार साफ नजर आ रहे हैं। विपक्ष इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाने की तैयारी में है। पार्षदों का कहना है कि यदि कार्यकारिणी में ही प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही तो बोर्ड बैठक में जवाब मांगना लाजमी है।
बैठक में नगर आयुक्त दिव्यांशु पटेल, अपर नगर आयुक्त अतुल कुमार व अजीत कुमार सिंह सहित अन्य अधिकारी और सदस्य बैठक में मौजूद रहे। अब सबकी नजरें बोर्ड बैठक पर टिकी हैं, जहां बजट पर अंतिम मुहर लगनी है।
