Budhana/Muzaffarnagar मेरठ-करनाल हाईवे पर सराय चौकी के पास हुई इस दर्दनाक घटना में एक तेज रफ्तार ट्रक ने मोटरसाइकिल सवार को टक्कर मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह नहीं रहा कि टक्कर कैसे हुई, बल्कि यह बन गया कि एक घायल व्यक्ति को समय पर जीवन रक्षक सहायता क्यों नहीं मिल पाई।


🔴 हादसे का पूरा घटनाक्रम: सेकेंडों में बदली जिंदगी

यह घटना उस समय हुई जब गाजियाबाद निवासी प्रमोद, पुत्र चंद्रपाल, शामली से अपना काम निपटाकर घर लौट रहे थे। मेरठ-करनाल हाईवे पर उनकी मोटरसाइकिल सामान्य गति से आगे बढ़ रही थी कि तभी पीछे से आए एक अज्ञात तेज रफ्तार ट्रक ने जोरदार टक्कर मार दी।

टक्कर इतनी भीषण थी कि प्रमोद अपनी बाइक समेत कई मीटर दूर जाकर सड़क पर गिर पड़े। आसपास मौजूद लोगों के अनुसार, टक्कर की आवाज दूर तक सुनाई दी और मौके पर अफरा-तफरी मच गई। राहगीरों ने तुरंत पुलिस और एंबुलेंस सेवा को सूचना दी।


🔴 गंभीर चोट, पैर में फ्रैक्चर की आशंका

हादसे में प्रमोद के पैर में गंभीर चोट आई। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि वह दर्द से कराह रहे थे और खून बह रहा था। कुछ लोगों ने उन्हें सड़क से हटाकर किनारे लिटाया और प्राथमिक मदद देने की कोशिश की, लेकिन स्थिति ऐसी थी कि तुरंत चिकित्सा सहायता की जरूरत थी।

Budhana road accident के इस मामले में स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर एंबुलेंस पहुंच जाती, तो घायल को जल्दी अस्पताल पहुंचाया जा सकता था और उसकी हालत इतनी नहीं बिगड़ती।


🔴 108 एंबुलेंस की देरी, 30 मिनट तक इंतजार

सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि 108 एंबुलेंस सेवा को कई बार फोन करने के बावजूद करीब 30 मिनट तक कोई वाहन घटनास्थल पर नहीं पहुंचा। इस दौरान प्रमोद सड़क किनारे दर्द में तड़पते रहे।

सराय चौकी प्रभारी रजत ने भी पुष्टि की कि एंबुलेंस को सूचना दी गई थी, लेकिन वह तय समय में मौके पर नहीं पहुंची। यह देरी न केवल घायल के लिए खतरनाक साबित हो सकती थी, बल्कि यह पूरे आपातकालीन तंत्र पर सवाल खड़े करती है।


🔴 परिजनों ने संभाली जिम्मेदारी

जब काफी समय तक एंबुलेंस नहीं आई, तो प्रमोद के परिजनों को सूचना दी गई। वे अपनी निजी गाड़ी लेकर घटनास्थल पर पहुंचे और घायल प्रमोद को तुरंत बुढ़ाना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) ले गए।

सीएचसी में प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने प्रमोद की हालत को गंभीर बताते हुए उन्हें जिला अस्पताल मुजफ्फरनगर रेफर कर दिया। डॉक्टरों का कहना था कि पैर में गंभीर चोट और संभावित फ्रैक्चर के कारण उन्हें विशेषज्ञ इलाज की जरूरत है।


🔴 हाईवे पर तेज रफ्तार: एक पुरानी समस्या

मेरठ-करनाल हाईवे उत्तर प्रदेश के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक है। भारी वाहनों, ट्रकों और बसों की तेज आवाजाही के कारण यहां दुर्घटनाओं का खतरा हमेशा बना रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्पीड लिमिट और ट्रैफिक नियमों का पालन न होने से आए दिन हादसे होते रहते हैं।

Budhana road accident ने एक बार फिर इस मुद्दे को केंद्र में ला दिया है कि हाईवे पर निगरानी और ट्रैफिक नियंत्रण के लिए और सख्त कदम उठाने की जरूरत है।


🔴 सड़क सुरक्षा अभियानों पर उठे सवाल

सरकार द्वारा सड़क सुरक्षा को लेकर लगातार विज्ञापन और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। हेलमेट पहनने, गति सीमा का पालन करने और सुरक्षित ड्राइविंग के संदेश हर जगह दिखाई देते हैं।

लेकिन इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सिर्फ विज्ञापन से ही सड़कें सुरक्षित बन सकती हैं? स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब तक नियमों का सख्ती से पालन नहीं कराया जाएगा और दोषियों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसे हादसे रुकने वाले नहीं हैं।


🔴 आपात सेवाओं की हकीकत

108 एंबुलेंस सेवा को देश में आपातकालीन स्वास्थ्य सहायता की रीढ़ माना जाता है। लेकिन Budhana road accident में हुई देरी ने इस व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क दुर्घटना के बाद पहला “गोल्डन आवर” सबसे महत्वपूर्ण होता है। इसी समय के भीतर अगर घायल को सही इलाज मिल जाए, तो उसकी जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में आधे घंटे की देरी किसी की जिंदगी पर भारी पड़ सकती है।


🔴 प्रशासन की प्रतिक्रिया और जांच की मांग

हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने मांग की है कि अज्ञात ट्रक चालक की पहचान कर उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। पुलिस का कहना है कि आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि ट्रक का पता लगाया जा सके।

साथ ही, एंबुलेंस सेवा की देरी को लेकर भी जांच की मांग उठी है। लोगों का कहना है कि यदि इस तरह की लापरवाही पर कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में भी घायल मरीजों को इसी तरह परेशान होना पड़ेगा।


🔴 आम नागरिकों की चिंता और गुस्सा

Budhana road accident के बाद सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर लोगों में नाराजगी देखने को मिली। नागरिकों का कहना है कि हाईवे पर हर दिन हजारों लोग सफर करते हैं, लेकिन सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं।

कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि जब एंबुलेंस सेवा समय पर नहीं पहुंच सकती, तो आपात स्थिति में आम आदमी किस पर भरोसा करे?


🔴 हादसों से सबक लेने की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क सुरक्षा केवल सरकार या पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर वाहन चालक और नागरिक की साझा जिम्मेदारी है। तेज रफ्तार, ओवरटेकिंग और लापरवाही से ड्राइविंग जैसे कारणों से ऐसे हादसे होते हैं।

Budhana road accident एक चेतावनी है कि नियमों की अनदेखी और व्यवस्था की कमजोरी मिलकर किसी की जिंदगी को पलभर में बदल सकती है।


मेरठ-करनाल हाईवे पर हुआ यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा और आपात सेवाओं की व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल है। घायल प्रमोद की हालत और एंबुलेंस की देरी ने यह साफ कर दिया है कि जागरूकता के साथ-साथ जमीनी स्तर पर मजबूत सिस्टम की जरूरत है, ताकि किसी और को इस तरह सड़क किनारे मदद के इंतजार में अपनी तकलीफ के साथ अकेला न रहना पड़े।

 



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