इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने पुलिस अधिकारियों द्वारा दर्ज कराई जाने वाली प्राथमिकियों में फिल्मी डॉयलॉग के इस्तेमाल पर आश्चर्य जताया है। दरअसल, बहराइच जनपद के गो-हत्या के एक मामले में पुलिस द्वारा दर्ज कराई गई एक एफआईआर में लिखा है कि जब पुलिस टीम अभियुक्तों को गिरफ्तार करने पहुंची तो पहले चेतावानी दी कि तुम लोग पुलिस से घिर चुके हो, आत्मसमर्पण कर दो। 

कोर्ट ने कहा कि यह अजीब है कि फिल्मों में ऐसे डॉयलॉग इस्तेमाल होते हैं, वही पुलिस की एफआईआर में भी हैं। कोर्ट ने एसपी बहराइच को सम्बंधित मामले में पाई गई विसंगतियों पर स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही, याची – अभियुक्त की गिरफ़्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को निर्धारित की है। 

 न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन और न्यायमूर्ति पी के श्रीवास्तव की खंडपीठ ने यह आदेश  अकबर अली की याचिका पर पारित किया। याची ने 22 जनवरी 2026 को बहराइच जिले के जरवल रोड थाने में दर्ज एफआईआर को चुनौती दी थी। मामले में अभियोजन के मुताबिक मुखबिर की सूचना पर पुलिस दल ने गो-हत्या एवं हत्या के प्रयास के आरोप में तीन व्यक्तियों को मौके से गिरफ्तार किया था और घटनास्थल से फरार हो गये चौथे अभियुक्त के रूप में याची का नाम सामने आया।

एफआईआर को देखकर, अदालत ने पाया कि घटना का समय प्रातः 10:45 बजे अंकित है, जबकि एफआईआर में कहा गया है कि अभियुक्तगण आपस में बात कर रहे थे कि ‘अब उजाला होने वाला है’। कोर्ट ने कहा कि पौने 11 बजे अभियुक्तगण यह कैसे कह रहे थे कि अब उजाला होने वाला है। कहा कि एफआईआर की तमाम बातें फिल्मी पटकथा जैसी प्रतीत हो रही हैं। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि कोर्ट के सामने बार-बार ऐसी एफआईआर आ रही हैं जिनमें प्रयुक्त भाषा जमीनी हकीकत को प्रतिबिंबित नहीं करती हैं, बल्कि वह सुनी-सुनाई, लिखित-पटकथा जैसी तथा फिल्मों से अत्यधिक प्रभावित, काल्पनिक और अत्यधिक बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत की गई प्रतीत होती है।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *