हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने समीक्षा अधिकारी/ सहायक समीक्षा अधिकारी( आर ओ/ ए आर ओ) के पदों पर भर्ती – 2023 के लिए हुई प्रारंभिक परीक्षा में अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण के मुद्दे उठाने वाली याचिका को पहले से विचाराधीन अन्य याचिका के साथ संबद्ध करके सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है।
पहले, विवेक यादव व अन्यअभ्यर्थियों की याचिका पर हाईकोर्ट ने उप्र लोकसेवा आयोग को को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया था। अब इस नई याचिका पर भी कोर्ट ने पक्षकारों को अपने जवाब और इसके प्रतिउत्तर दाखिल करने का समय दिया है।
न्यायमूर्ति मनीष माथुर की एकल पीठ ने शुक्रवार को यह आदेश विजय कुमार सोनी व 23 अन्य अभ्यर्थियों की याचिका पर दिया। याचियों के अधिवक्ता कृष्ण कन्हैया पाल ने कहा कि प्रारंभिक परीक्षा परिणाम में ओ बी सी अभ्यर्थियों का कट ऑफ , सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों से अधिक होने के बावजूद, ऐसे ओ बी सी अभ्यर्थियों को प्री परीक्षा में फेल करके, मुख्य परीक्षा के लिए अयोग्य करार दिया गया।
अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि इस तरह आयोग ने प्री परीक्षा में ओ बी सी आरक्षण में कथित अनियमितता करके ओ बी सी सीटों को सामान्य वर्ग में समायोजित किया, जो कानून की मंशा के खिलाफ था। इसके खिलाफ याचियों ने याचिका दाखिल कर प्री परीक्षा परिणाम की मेरिट सूची का पुनः निर्धारण करके मुख्य परीक्षा कराए जाने का आग्रह किया है।
