राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्राथमिक संवर्ग ने परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों के तीसरे चरण के समायोजन में अनियमितता के आरोप लगाए हैं। साथ ही इन समायोजन को निरस्त करने की मांग की है। प्रदेश अध्यक्ष शिवशंकर सिंह ने बताया कि बेसिक के विद्यालयों में शिक्षकों के शैक्षिक सत्र 2025-26 में तीसरे चरण के समायोजन में शिक्षकविहीन व एकल विद्यालयों में सरप्लस को समायोजित करने का आदेश शासन ने दिया था। इस क्रम में जिला स्तर पर गठित समिति द्वारा समायोजन की कार्यवाही 30 दिसंबर तक की जानी थी। किंतु जिला स्तर पर समायोजन में काफी गड़बड़ी की गयी हैं।

उन्होंने कहा है कि जिला स्तर पर सरप्लस शिक्षकों का निर्धारण व विद्यालय आवंटन में एकरूपता न होकर अलग-अलग मानक अपनाये गए हैं। कई जिलों में वरिष्ठ तथा कई में कनिष्ठ शिक्षकों को सरप्लस मानकर समायोजित कर दिया गया है। इसमें शिक्षामित्रों व अनुदेशकों की गणना शिक्षक के रूप में की गई है, जो पूर्व में जारी विभागीय आदेशों के विरुद्ध है।

वहीं कुछ जिलों में सरप्लस शिक्षकों से विकल्प लेकर विद्यालय आवंटित किये गए हैं, तो कुछ में बिना विकल्प लिए ही शिक्षकों को अन्य विद्यालयों में समायोजित कर दिया गया है। प्रदेश महामंत्री प्रदीप तिवारी ने बताया कि प्रदेश के कुछ जिलों में बंद विद्यालयों को खोलने के लिए दूसरे विद्यालय को एकल कर शिक्षक भेज दिया गया। जबकि अन्य विद्यालयों में संख्या पर्याप्त थी। वहा से शिक्षक नहीं लिया गया। समायोजित शिक्षकों को विद्यालय से कार्यमुक्त/कार्यभार ग्रहण कराये बिना ही यू-डायस पोर्टल पर उनके विद्यालय बदल दिये गए हैं। यह अब तक स्थापित विभागीय व्यवस्था के एकदम विपरीत है।

प्रदेशीय मीडिया प्रभारी बृजेश श्रीवास्तव ने बताया कि संगठन ने जिला स्तर पर किये गए समायोजन को निरस्त करने और कमियों को दूर कराकर एक समान पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की मांग की है। इसके लिए अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा, महानिदेशक स्कूल शिक्षा, बेसिक शिक्षा निदेशक व सचिव बेसिक शिक्षा परिषद को ज्ञापन भेजा गया है।



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