स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े-बड़े दावों के बीच राजधानी में एक बार फिर मानवता शर्मसार हुई है। गोरखपुर से आए एक बुजुर्ग मरीज वेंटिलेटर के लिए एक से दूसरे संस्थान भटकते रहे, लेकिन उन्हें समय पर इलाज नहीं मिला। एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस में करीब डेढ़ घंटे तक तड़पने के बाद देवरिया निवासी पारसनाथ पांडेय (65) की बलरामपुर अस्पताल में मौत हो गई।

हैरानी की बात यह रही कि जिस वक्त मरीज एंबुलेंस में जिंदगी की जंग लड़ रहा था, उस समय स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव, डीजी हेल्थ और सीएमओ समेत तमाम आला अफसर अस्पताल में ही मौजूद थे। कुछ ही देर पहले डिप्टी सीएम वहां से निकले थे, लेकिन किसी भी अधिकारी की नजर तड़पते मरीज पर नहीं पड़ी।

केजीएमयू से बलरामपुर तक का संघर्ष

सांस और लिवर की गंभीर बीमारी से जूझ रहे पारसनाथ को परिजन बुधवार सुबह केजीएमयू लेकर पहुंचे थे। वहां एक घंटे तक एंबुलेंस में रहने के बाद डॉक्टरों ने वेंटिलेटर खाली न होने का हवाला देकर बलरामपुर अस्पताल रेफर कर दिया। दोपहर करीब 12:30 बजे परिजन मरीज को लेकर बलरामपुर अस्पताल पहुंचे। बेटे चंद्रप्रकाश का आरोप है कि इमरजेंसी में परचा और फाइल बनाने की प्रक्रिया में ही आधा घंटा बर्बाद हो गया। जब तक मरीज को आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट दिया गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी और उन्होंने दम तोड़ दिया।



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