शासन ने हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामा में भले ही समय से पंचायत चुनाव कराने का दावा किया है, लेकिन तमाम जटिल प्रक्रियाओं के चलते ऐसा होना संभव होती नहीं दिख रहा है। समय से चुनाव कराने में सबसे अधिक बाधा समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन न होना है। गठन के बाद भी आयोग को सीटों की आरक्षण प्रक्रिया तय करने में एक से डेढ़ महीने तक का समय चाहिए। इसके अलावा कई और भी औपचारिकताएं पूरी करनी बड़ी चुनौती होगी। ऐसे में समय से चुनाव कराने को लेकर अभी भी असमंजस की स्थिति है।
बता दें कि प्रदेश में इसी साल अप्रैल-मई में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराए जाने का सयम नियत है। लेकिन अभी तक समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन नहीं हो पाया है। इस वजह से आगे की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है। हालांकि इससे पहले पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने भी प्रदेश में पंचायत चुनाव समयानुसार अप्रैल-मई में कराए जाने की बात कह चुके हैं, लेकिन तैयारियों के लिहाज से इसको लेकर संशय है। वहीं, सूत्रों का कहना है कि अभी भी यदि समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया जाता है तो भी समय से चुनाव कराना संभव नहीं है। कम से कम एक या दो महीने चुनाव को टालना ही पड़ सकता है।
