पिछले पांच वर्षों में केंद्रीय आम बजट में लखनऊ के लिए की गई कई महत्वपूर्ण घोषणाओं ने या तो धरातल पर उतरकर रफ्तार पकड़ी है, या फिर वे अब भी अधर में लटकी हैं। डिफेंस कॉरिडोर के तहत स्थापित लखनऊ इकाई से वर्ष 2025 में ब्रह्मोस मिसाइल की पहली खेप बनकर निकली। वहीं, लखनऊ को प्रदेश के प्रमुख शहरों से जोड़ने वाली सस्ती हवाई यात्रा की घोषणाएं अभी तक हकीकत नहीं बन पाई हैं।

राजधानी लखनऊ को बीते पांच वित्तीय वर्षों के दौरान केंद्रीय बजट में कई महत्वपूर्ण सौगातें देने की घोषणाएं की गई थीं। इनमें सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल का निर्माण भी शामिल था, जिसका कार्य प्रगति पर है। केंद्रीय बजट की घोषणाओं का सकारात्मक प्रभाव लखनऊ के रेल और सड़क यातायात पर तो स्पष्ट रूप से दिखाई दिया, लेकिन लखनऊ से अमेठी, सुल्तानपुर, फतेहपुर, प्रतापगढ़ और पलिया जैसे शहरों के बीच हवाई पट्टियों को एयरपोर्ट बनाकर हवाई यात्राएं शुरू करने की योजनाएं अभी तक शुरू ही नहीं हो पाई हैं। 

इंटरनेट के अभाव में स्मार्ट क्लास और कंप्यूटर लैब का भविष्य अनिश्चित

सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध कराने की घोषणा भी बजट का हिस्सा थी। इसके लिए अंडरलाइन तो बिछाई गई, लेकिन कनेक्शन स्थापित नहीं हो सके हैं। इस कारण न तो स्मार्ट क्लासरूम सुचारू रूप से चल पा रहे हैं और न ही कंप्यूटर लैब में प्रशिक्षण संभव हो पा रहा है। शिक्षक निजी वाई-फाई का उपयोग कर व्यवस्था चला रहे हैं।

एमएसएमई क्रेडिट कार्ड का लाभ अब तक नहीं मिला

पिछले वर्ष एक फरवरी को पेश किए गए केंद्रीय बजट में सरकार ने विनिर्माण क्षेत्र पर जोर देते हुए देशभर में 10 लाख सूक्ष्म उद्यमों के लिए 5 लाख रुपये तक के क्रेडिट कार्ड की घोषणा की थी। इसका मुख्य उद्देश्य उन उद्यमों को वित्तीय सहायता देना था, जिन्हें धन की कमी के कारण संचालन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इसके अतिरिक्त, निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एक्सपोर्ट क्रेडिट कार्ड की भी घोषणा की गई थी। लखनऊ में 2.07 लाख से अधिक छोटे उद्यम पंजीकृत हैं, जिनमें से अधिकांश ओडीओपी (एक जिला एक उत्पाद) उत्पाद, जैसे चिकनकारी, से जुड़े हैं। अकेले चिकनकारी उद्योग का ही 2000 करोड़ रुपये से अधिक का वार्षिक कारोबार है, जिसमें 300 करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात बाजार शामिल है। इसके बावजूद, इन दोनों महत्वपूर्ण घोषणाओं का लाभ अब तक उद्यमियों तक नहीं पहुंच सका है। लखनऊ में प्रमुख रूप से चिकनकारी, फ्लोर मिल, प्लास्टिक, स्टील उत्पाद, केबल, इलेक्ट्रिक उपकरण, होम्योपैथ दवाएं और फैब्रिकेटिंग जैसे छोटे उद्योग संचालित होते हैं।



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