लंबे समय से बंदरों को पकड़ने को लेकर नगर निगम और वन विभाग के बीच चल रही खींचतान पर शनिवार को विराम लग गया। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में बंदर पकड़ने और उनके प्रबंधन की पूरी जिम्मेदारी वन विभाग को सौंप दी गई है। शासन की ओर से इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।
बैठक में स्पष्ट किया गया कि बंदर वन्यजीव की श्रेणी में आते हैं और उनके व्यवहार, प्रबंधन व पुनर्वास से जुड़ी विशेषज्ञता वन विभाग के पास उपलब्ध है। इसी आधार पर यह जिम्मेदारी पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को सौंपी गई है। वन विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वह एक माह के भीतर समेकित कार्ययोजना तैयार करे। आवश्यकता पड़ने पर अन्य विभागों का सहयोग भी उपलब्ध कराया जाएगा।
दरअसल, बंदरों का आतंक केवल राजधानी लखनऊ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समस्या पूरे प्रदेश में गंभीर रूप ले चुकी है। आए दिन बंदरों के हमले और काटने की शिकायतें सामने आ रही थीं, लेकिन जिम्मेदारी तय न होने के कारण कार्रवाई प्रभावित हो रही थी। नगर निगम और वन विभाग के बीच इसे लेकर कई बार पत्राचार हुआ और मामला मुख्यमंत्री कार्यालय तक भी पहुंचा। इसके बाद शासन स्तर पर निर्णय लेते हुए स्थिति स्पष्ट की गई।
