प्रदेश में प्रीपेड स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता खत्म हो गई है। अब सिर्फ स्मार्ट मीटर लगेंगे। इसके लिए केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने आदेश जारी कर दिया है। यह आदेश एक अप्रैल को ही अधिसूचित किया गया है। प्रदेश में करीब 78 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर लगे हैं, जिसमें 70 लाख स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगे हैं। पावर कार्पोरेशन की ओर से नए विद्युत कनेक्शन पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाया जा रहा है। 


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प्रीपेड की अनिवार्यता का राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद विरोध कर रहा है। संसद में सवाल उठने पर केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी कहा कि प्रीपेड अनिवार्य नहीं है। यह उपभोक्ताओं की इच्छा पर निर्धर करता है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने कहा था कि राष्ट्रीय कानून विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के तहत उपभोक्ताओं के परिसर पर पोस्टपेड व प्रीपेड मोड में लगाने की बात कही थी। 

इसके बाद भी ज्यादातर उपभोक्ताओं के यहां प्रीपेड मीटर ही लगाए जा रहे थे। विद्युत उपभोक्ता परिषद लगाता इसका विरोध कर रहा था। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने एक अप्रैल 2026 को नई अधिसूचना जारी कर दिया है। इसमें यह संशोधन कर दिया कि जिस भी क्षेत्र में संचार नेटवर्क मौजूद है वहां पर सभी बिजली कनेक्शन स्मार्ट मीटर के रूप में दिए जाएंगे। प्रीपेड की अनिवार्यता जो पहले थी उसे हटा दिया गया है। स्मार्ट मीटर के रूप में कनेक्शन तो दिए जाएंगे, लेकिन प्रीपेड मोड उपभोक्ताओं के विकल्प पर आधारित होगा।



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